मानसून सत्र से पहले मायावती ने केंद्र सरकार और विपक्ष को दी बड़ी नसीहत, जनहित के मुद्दों पर हो गंभीर चर्चा

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महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अर्थव्यवस्था समेत कई मुद्दों को संसद में उठाने की कही बात
नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सोशल मीडिया मंच X पर सिलसिलेवार पोस्ट कर केंद्र सरकार और विपक्ष से जनहित के ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र हंगामे और बार-बार स्थगन की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए, बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दों का संतोषजनक समाधान निकालने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गबन के आरोपों को लेकर व्यापक जनआक्रोश है। उनके अनुसार, इस मुद्दे की गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है और संसद में भी इस पर चर्चा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि लोग धर्म के राजनीतिकरण करने वालों से जवाबदेही मांग रहे हैं।
बसपा प्रमुख ने पश्चिम बंगाल के चुनाव बाद की स्थिति, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, चुनावी घोषणाओं में कथित अनियमितताओं, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों और बस्तियों के ध्वस्तीकरण जैसे विषयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों से संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव तथा रुपये के अवमूल्यन का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में मिलकर समाधान तलाशने की अपील की।
मायावती ने कहा कि संसद का मानसून सत्र शांतिपूर्ण, सुचारु और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होना चाहिए। उन्होंने सभी संस्थाओं से भी आग्रह किया कि वे देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों को कम करने के लिए प्रभावी प्रयास करें। उन्होंने कहा कि संसद को राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, क्योंकि जनहितैषी सुशासन के लिए संसद का प्रभावी होना अत्यंत आवश्यक है।

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