30 सूत्री मांगों पर शिक्षकों का हल्लाबोल, सकलडीहा पीजी कॉलेज में काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
पुरानी पेंशन, सम्मानजनक सेवा शर्तें और यूजीसी वेतनमान जैसे मुद्दों पर शिक्षकों की एकजुटता ने उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े 30 लंबित सवालों को फिर केंद्र में ला दिया है। काली पट्टी के साथ शुरू हुआ विरोध अब शासन के सामने शिक्षकों की संगठित आवाज बनकर उभरा है।

तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी आंदोलन का आगाज, पुरानी पेंशन बहाली से लेकर यूजीसी वेतनमान तक उठाई आवाज
सकलडीहा (चंदौली)। पुरानी पेंशन की बहाली, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने और यूजीसी वेतनमान समेत 30 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को सकलडीहा पीजी कॉलेज में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के आह्वान पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदेशव्यापी आंदोलन के प्रथम चरण का हिस्सा है, जो 2 से 4 नवंबर तक तीन दिनों तक चलेगा। प्रदर्शन में अनुदानित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।
शिक्षकों ने कहा कि लंबे समय से उनकी मांगें लंबित हैं, लेकिन शासन और संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी के विरोध में आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उनकी प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, अधिवर्षता आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करना, चिकित्सकीय अवकाश की सुविधा और स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाना शामिल है।
इसके अलावा अर्हता प्राप्त करने की तिथि से प्रोफेसर पदनाम देने, एनपीएस से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने तथा शोध एवं शैक्षणिक संगोष्ठियों के आयोजन के लिए पर्याप्त बजट आवंटित करने की मांग उठाई गई। शिक्षकों ने अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदानित व्यवस्था में शामिल करने और वहां कार्यरत शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान देने पर भी जोर दिया।
आंदोलन में सेवानिवृत्त शिक्षकों के जीपीएफ भुगतान की समस्या दूर करने, महाविद्यालय के प्रोफेसरों को विश्वविद्यालय की विभिन्न प्राधिकारी परिषदों में समुचित प्रतिनिधित्व देने तथा परीक्षा पारिश्रमिक और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से जुड़े यात्रा भत्ते का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
शिक्षकों का कहना था कि उच्च शिक्षा व्यवस्था की मजबूती शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तों से जुड़ी है। समान शैक्षणिक दायित्व निभाने वाले शिक्षकों के बीच वेतन और सुविधाओं की असमानता दूर होनी चाहिए। लंबित मांगों की अनदेखी से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। काली पट्टी बांधकर किया गया प्रदर्शन इसी असंतोष और एकजुटता का प्रतीक है।
इस दौरान शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष प्रो. दयानिधि सिंह यादव, प्रो. इंद्रदेव सिंह, प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. शमीम राईन, डॉ. राजेश यादव, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. अजय यादव, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. यज्ञनाथ, डॉ. सीता मिश्र, डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. श्यामलाल यादव, डॉ. वंदना, डॉ. अमन, डॉ. रजनीश गुप्त, डॉ. अनामिका सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।