चंदौली: सकलडीहा सर्किल में लंबित विवेचनाओं पर एसपी का बड़ा एक्शन, एक विवेचक निलंबित, तीन के खिलाफ जांच

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60/90 दिन में विवेचना पूरी न करने पर गिरी गाज, एसपी आकाश पटेल ने दी सख्त चेतावनी—लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं
चंदौली। जनपद में लंबित विवेचनाओं के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने सख्त रुख अपनाया है। 13 अगस्त 2026 को सकलडीहा सर्किल में लंबित विवेचनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित अर्दली रूम के दौरान विवेचनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर एक विवेचक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि तीन अन्य विवेचकों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई समीक्षा में खास तौर पर उन मुकदमों को प्राथमिकता से देखा गया, जिनकी विवेचना 60 अथवा 90 दिन के भीतर पूरी की जानी थी। समीक्षा के दौरान कई मामलों में निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद विवेचनात्मक कार्रवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ने पर एसपी ने नाराजगी जताई।
सबसे गंभीर कार्रवाई थाना धानापुर में दर्ज एक मुकदमे की विवेचना को लेकर की गई। थाना धानापुर पर पंजीकृत मु0अ0सं0-04/2025, धारा 125बी, 281 और 324(2) बीएनएस की विवेचना में अपेक्षित प्रगति नहीं पाई गई। पुलिस के अनुसार अभियोग पंजीकृत हुए लगभग एक वर्ष छह माह का समय बीत जाने के बावजूद विवेचनात्मक कार्यवाही पूरी नहीं की गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए उप निरीक्षक ना0पु0 सकलैन अहमद, थाना धानापुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
एसपी की इस कार्रवाई को लंबित विवेचनाओं के प्रति पुलिस विभाग के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को लगातार निर्देशित किया जा रहा है कि मुकदमों की विवेचना में अनावश्यक देरी न हो और पीड़ितों को समयबद्ध तरीके से न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समीक्षा के दौरान थाना धीना और थाना बलुआ पर पंजीकृत कुछ अभियोगों की विवेचनाओं की स्थिति भी सामने आई। इन मामलों में भी 60 और 90 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने तथा घटनाओं का अनावरण नहीं किए जाने की स्थिति पर पुलिस अधीक्षक ने गंभीरता दिखाई। विवेचनात्मक कार्यवाही में शिथिलता पाए जाने पर संबंधित तीन विवेचकों के विरुद्ध जांच के आदेश दिए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने समीक्षा के दौरान सभी विवेचकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 60/90 दिवस के भीतर निस्तारित होने वाली विवेचनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसके लिए घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों का विधिवत संकलन, साक्ष्यों का परीक्षण, संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का निर्धारित समय में पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी मामले की विवेचना केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच करते हुए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचना पुलिस की जिम्मेदारी है। विवेचना में देरी होने से पीड़ित और उनके परिवार को न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब होता है, इसलिए ऐसे मामलों में विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए।
पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों और विवेचकों को यह भी निर्देश दिया कि लंबित विवेचनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और जिन मामलों में किसी कारण से प्रगति प्रभावित हो रही है, उनकी जानकारी उच्चाधिकारियों को समय से दी जाए, ताकि आवश्यक मार्गदर्शन और कार्रवाई की जा सके।
एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस की प्राथमिकता केवल मुकदमा दर्ज करना नहीं, बल्कि उसकी विवेचना को निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा करना है। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों के संकलन और परीक्षण में लापरवाही, अनावश्यक देरी अथवा विवेचना को लंबित रखने की प्रवृत्ति को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई के बाद सकलडीहा सर्किल समेत जनपद के अन्य थानों में भी लंबित विवेचनाओं को लेकर पुलिसकर्मियों में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। विभागीय स्तर पर यह संदेश साफ तौर पर दिया गया है कि निर्धारित अवधि में विवेचना पूरी नहीं करने और कार्य में शिथिलता बरतने पर संबंधित पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
एसपी आकाश पटेल ने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए विवेचना प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि विवेचनाओं में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि चंदौली पुलिस में लंबित विवेचनाओं को लेकर अब नियमित समीक्षा और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक विवेचक का निलंबन और तीन के खिलाफ जांच के आदेश इसी सख्त नीति का हिस्सा हैं।

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