जिलाधिकारी के आश्वासन पर पूर्व विधायक ने स्थगित किया धरना, व्यवस्थाएं सुधारने के लिए मांगी एक माह की मोहलत

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चन्दौली। बाबा कीनाराम स्वशासी मेडिकल कॉलेज चन्दौली में कथित भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और मरीजों से इलाज के नाम पर अनधिकृत वसूली के आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह डब्लू द्वारा घोषित धरना-प्रदर्शन को जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल एक माह के लिए स्थगित कर दिया गया है। पूर्व विधायक के धरना-प्रदर्शन के ऐलान के बाद सोमवार को जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हलचल तेज हो गई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने पूर्व विधायक से बातचीत की और उनकी नौ सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज से संबंधित शिकायतों की जांच और व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के लिए तीन सदस्यीय टीमों का गठन किया है। प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू होने के साथ ही जिलाधिकारी ने सभी बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई के लिए एक माह का समय मांगा।
 जिलाधिकारी की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह डब्लू ने अपने समर्थकों के साथ प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को एक माह के लिए स्थगित कर दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ और मरीजों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वह दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
पूर्व विधायक ने मेडिकल कॉलेज में मरीजों और उनके परिजनों को हो रही कथित परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज का उद्देश्य गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को बेहतर एवं सुलभ इलाज उपलब्ध कराना है। यदि किसी मरीज या उसके परिजन को इलाज, ऑपरेशन, जांच या दवा के नाम पर अतिरिक्त धनराशि देने के लिए मजबूर होना पड़ता है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अनधिकृत वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
पूर्व विधायक के मुताबिक, उन्हें एक ऐसे मामले की जानकारी मिली जिसमें एक विधवा महिला मरीज के रूप में मेडिकल कॉलेज में भर्ती थी। आरोप है कि उसके ऑपरेशन और इलाज के नाम पर पहले 30 हजार रुपये और फिर 13 हजार रुपये की मांग की गई। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि मामला सार्वजनिक होने और इसकी जानकारी जनप्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन तक पहुंचने की आशंका के बाद कथित रूप से 10 हजार रुपये की मांग पर बात अटक गई। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इस तरह की मांग बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पूर्व विधायक का आरोप है कि कथित वसूली और अव्यवस्था से परेशान होकर मरीज के परिजनों को बाहर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी गरीब मरीज को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाला अधिकांश मरीज वर्ग आर्थिक रूप से कमजोर होता है। ऐसे लोगों के लिए मेडिकल कॉलेज किसी उम्मीद से कम नहीं है। यदि उन्हें अस्पताल के भीतर मिलने वाली सुविधाओं के लिए भी बाहर से व्यवस्था करनी पड़े तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता है। इसलिए मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
नौ सूत्रीय मांगों को लेकर उठाई आवाज
पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह डब्लू ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर नौ सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखीं। उन्होंने मांग की कि विधवा मरीज से इलाज के नाम पर रुपये मांगे जाने के आरोपों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा आरोप सही मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने इलाज और ऑपरेशन के नाम पर किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली तत्काल बंद कराने की मांग की। उनका कहना है कि मरीजों से सरकारी स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर अतिरिक्त धनराशि नहीं ली जानी चाहिए और अस्पताल में होने वाली प्रत्येक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
पूर्व विधायक ने अस्पताल में उपलब्ध दवाओं को मरीजों को अस्पताल से ही उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी दवा की उपलब्धता अस्पताल में है तो मरीज या उसके परिजन को उसे बाहर से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही अनावश्यक रूप से बाहर की दवाएं लिखे जाने पर भी रोक लगाने की मांग की गई।
उन्होंने मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध जांच सुविधाओं को अस्पताल परिसर में ही प्रभावी ढंग से संचालित कराने की मांग की। उनका कहना है कि जिन जांचों की सुविधा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है, उनके लिए मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए। इससे गरीब मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।
नई बिल्डिंग में मरीजों की सुविधा के लिए पर्याप्त पर्ची और रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थापित करने की भी मांग उठाई गई। इसके साथ ही डिजिटल और क्यूआर कोड आधारित रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई, ताकि मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा न होना पड़े और पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक बन सके।
पूर्व विधायक ने बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों के लिए अलग सहायता काउंटर बनाए जाने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए एक समर्पित सहायता केंद्र जरूरी है।
उन्होंने अस्पताल परिसर में अनधिकृत बाहरी व्यक्तियों की भूमिका समाप्त करने की मांग की। आरोप लगाया गया कि अस्पताल परिसर में बाहरी लोगों की अनावश्यक मौजूदगी मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में अस्पताल की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
मरीजों की शिकायतों के समाधान के लिए स्थायी और जवाबदेह शिकायत डेस्क बनाए जाने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई। पूर्व विधायक ने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों को अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान प्राप्त करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था मिलनी चाहिए। शिकायतों पर कार्रवाई की समयसीमा भी निर्धारित होनी चाहिए, जिससे व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा डॉक्टरों की ड्यूटी, उपलब्ध जांच सुविधाओं और आवश्यक दवाओं के स्टॉक से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग की गई। पूर्व विधायक का कहना है कि अस्पताल में कौन से डॉक्टर किस समय ड्यूटी पर हैं, कौन-कौन सी जांच उपलब्ध है और किन आवश्यक दवाओं का स्टॉक मौजूद है, इसकी जानकारी मरीजों को आसानी से मिलनी चाहिए। इससे अस्पताल की व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और मरीजों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
जांच के लिए तीन सदस्यीय टीमों का गठन
पूर्व विधायक के आरोपों और नौ सूत्रीय मांगों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीमों का गठन किया है। प्रशासनिक स्तर पर गठित टीमों द्वारा मेडिकल कॉलेज से जुड़ी व्यवस्थाओं और शिकायतों की जांच की जा रही है। जिलाधिकारी ने पूर्व विधायक को भरोसा दिलाया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने और नौ सूत्रीय मांगों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए एक माह का समय मांगा। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद पूर्व विधायक ने तत्काल धरना शुरू करने के बजाय एक माह की मोहलत देने का निर्णय लिया।
पूर्व विधायक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
 उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समयबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान करता है तो आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। लेकिन यदि एक माह बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो वह मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं को लेकर फिर से आवाज उठाएंगे।
गरीब मरीजों तक पहुंचे सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ
पूर्व विधायक ने कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य संस्था का सबसे बड़ा लाभ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार की उम्मीद लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। ऐसे में पर्ची, जांच, दवा, ऑपरेशन और इलाज की प्रक्रिया जितनी सरल और पारदर्शी होगी, मरीजों को उतनी ही राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए छोटी-सी अतिरिक्त राशि भी बड़ा बोझ बन सकती है। इसलिए सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम लाभ मरीजों को बिना किसी अनावश्यक आर्थिक दबाव के मिलना चाहिए।
पूर्व विधायक के धरना स्थगित करने के बाद अब सभी की नजर जिला प्रशासन और जांच टीमों की कार्रवाई पर है। एक माह की अवधि में मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है और उठाई गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद प्रस्तावित धरना एक माह के लिए टल गया है, लेकिन पूर्व विधायक की ओर से यह संकेत साफ है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर इलाज, पारदर्शी व्यवस्था और सम्मानजनक व्यवहार उपलब्ध कराना अब प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती है। जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीमों की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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