आशियाने की तलाश में ब्लॉक परिसर में घुसे बेसहारा पशु, गो-संरक्षण के दावों की खुली पोल

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सकलडीहा में दिनभर बनी रही चर्चा, किसानों और राहगीरों के लिए भी परेशानी बने।
सकलडीहा, चंदौली। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गोवंश संरक्षण और बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय उपलब्ध कराने को लेकर लगातार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चंदौली जिले के सकलडीहा विकास खंड में सोमवार को सामने आया नजारा इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता नजर आया। आशियाने और सुरक्षित स्थान की तलाश में कई बेसहारा पशु सीधे सकलडीहा ब्लॉक मुख्यालय परिसर में पहुंच गए। ब्लॉक परिसर में पशुओं के डेरा जमाने की तस्वीर और चर्चा पूरे दिन क्षेत्र में बनी रही।

बताया जा रहा है कि बेसहारा पशु इधर-उधर भटकते हुए ब्लॉक परिसर के अंदर पहुंच गए। सरकारी कार्यालय परिसर में पशुओं के पहुंचने से वहां मौजूद लोगों और कर्मचारियों के बीच भी इसकी चर्चा होने लगी। आमतौर पर जहां ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं, वहीं उसी परिसर में बेसहारा पशुओं का पहुंचना क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बेसहारा पशुओं की समस्या केवल ब्लॉक परिसर तक सीमित नहीं है। गांवों और मुख्य मार्गों पर बड़ी संख्या में पशु खुले में घूमते दिखाई देते हैं। दिन के समय ये पशु सड़कों और बाजारों के आसपास विचरण करते हैं, जबकि रात में खेतों की ओर पहुंचकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे किसानों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
फसलों की रखवाली करना किसानों की मजबूरी
बेसहारा पशुओं के कारण किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार खेतों में तैयार हो रही फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रातभर जागकर निगरानी करनी पड़ती है। कई किसान खेतों के चारों ओर अस्थायी घेराबंदी करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद पशुओं के झुंड खेतों में पहुंच जाते हैं और फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगी होती जा रही है। खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि लागत बढ़ने के बीच यदि बेसहारा पशु फसल को नुकसान पहुंचा दें तो किसान की मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित गोवंश आश्रय स्थलों में पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
सड़क पर दुर्घटना का भी बना खतरा
बेसहारा पशु किसानों के खेतों के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी परेशानी का कारण बने हुए हैं। सकलडीहा क्षेत्र की सड़कों पर कई बार पशुओं के अचानक सामने आ जाने से वाहन चालकों को ब्रेक लगाना पड़ता है। विशेषकर रात के समय सड़क पर बैठे या घूमते पशु दिखाई नहीं देने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर है। सड़क पर अचानक पशुओं के आ जाने से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं तेज रफ्तार वाहनों के सामने पशु आने पर गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस समस्या को केवल किसानों की फसल के नुकसान के नजरिए से नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जोड़कर भी देखना चाहिए।
गौशालाओं की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
सरकार की ओर से बेसहारा गोवंश को आश्रय देने के लिए गोवंश आश्रय स्थलों और गौशालाओं की व्यवस्था की गई है। इनके संचालन और पशुओं की देखभाल के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाएं किए जाने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद यदि बेसहारा पशु आश्रय की तलाश में सरकारी कार्यालय परिसर तक पहुंच रहे हैं तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, ब्लॉक परिसर में पशुओं के पहुंचने की घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा और क्षेत्र में संचालित गोवंश आश्रय स्थलों में उस समय कितने पशु मौजूद थे, इसकी आधिकारिक स्थिति संबंधित विभाग से स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में प्रशासन की ओर से वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
केवल पकड़ने से नहीं, स्थायी व्यवस्था से दूर होगी समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि बेसहारा पशुओं को पकड़कर कुछ दिनों के लिए कहीं पहुंचा देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि गोवंश आश्रय स्थलों की क्षमता, वहां उपलब्ध चारा-पानी, साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और नियमित निगरानी की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि आश्रय स्थलों में पर्याप्त व्यवस्था रहे तो पशुओं को सड़कों और खेतों में भटकने की नौबत नहीं आएगी। इसके साथ ही पशुओं को छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए, ताकि लोग अपने पशुओं को खुले में छोड़ने से बचें।
दिनभर चर्चा में रहा ब्लॉक परिसर का नजारा
सोमवार को ब्लॉक परिसर में बेसहारा पशुओं के पहुंचने की घटना स्थानीय लोगों के बीच दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। लोगों ने इसे गोवंश संरक्षण की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति से जोड़कर देखा। ग्रामीणों का कहना है कि जब बेसहारा पशु सुरक्षित आश्रय की तलाश में सरकारी कार्यालय परिसर तक पहुंच रहे हैं तो गांवों और सड़कों पर उनकी स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
फिलहाल घटना ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर एक बार फिर चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और क्या बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ किसानों की फसलों तथा राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि सकलडीहा क्षेत्र में खुले में घूम रहे बेसहारा पशुओं की पहचान कर उन्हें तत्काल सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाए और गोवंश संरक्षण की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

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