“नहीं डरेंगे, नहीं झुकेंगे, अपने अधिकार लेकर रहेंगे; किसानो की आवाज बुलंद थी, बुलंद है और सदा बुलंद रहेगी” — पिंटू पाल

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“न डरेंगे पुलिस के पहरे से, न रुकेंगे किसी दबाव से—किसान के हक की आवाज उठेगी हर गांव से।”

चन्दौली। किसानों के अधिकार, सम्मान और उनकी समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले किसान नेता पिंटू पाल ने देर रात पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। पिंटू पाल का कहना है कि किसानों के हितों की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई या किसी भी प्रकार के दबाव से किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।


फोटो: किसान नेता पिंटू पाल को उनके पैतृक आवास उकनी बीरम राय में डिटेन की हुई पुलिस 


पिंटू पाल के मुताबिक, 9 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे चन्दौली पुलिस द्वारा उन्हें डिटेन किया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को किसानों की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर एक किसान नेता की आवाज से प्रशासन को इतना डर क्यों है। उन्होंने कहा कि वह किसानों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते आए हैं और आगे भी किसानों की आवाज को मजबूती के साथ उठाते रहेंगे।

किसान नेता ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। किसान दिन-रात खेतों में मेहनत करता है, तब जाकर देशवासियों के घरों तक अन्न पहुंचता है। इसके बावजूद जब किसान अपनी जमीन, फसल, मुआवजा, सिंचाई, बिजली, सड़क, रोजगार और अन्य समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठाता है तो कई बार उसे समस्याओं के समाधान के बजाय विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को दबाने के बजाय प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए और समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

पिंटू पाल ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। वह किसानों के अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर प्रशासन और सरकार से सवाल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि किसी मुद्दे पर किसानों और प्रशासन के बीच मतभेद है तो उसका समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसानों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा की जाए।

उन्होंने कहा कि “अगर किसान अपनी बात भी नहीं रख सकता तो फिर लोकतंत्र किसके लिए है?” किसान अपने अधिकारों की मांग कर रहा है, किसी से अपना हक छीनने की बात नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी समस्याएं रखने, अधिकारियों से मिलने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए।

पिंटू पाल ने कहा कि वह शांतिपूर्ण आंदोलन और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास रखते हैं। उनका कहना है कि किसान किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थक नहीं है। किसान चाहता है कि उसकी मेहनत का उचित सम्मान मिले और उसकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन यदि किसानों के साथ संवाद करेगा तो कई समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से ही संभव है।

किसान नेता ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई, बिजली और मजदूरी सहित कई खर्च किसानों पर भारी पड़ते हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक आपदा या बाजार की स्थिति खराब होने पर किसान को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में किसानों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर समाधान की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि किसान की जमीन उसके लिए केवल संपत्ति नहीं बल्कि उसके परिवार की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य होती है। जमीन से जुड़े मामलों में किसानों की सहमति, उचित मुआवजा और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वह विरोध नहीं करते, लेकिन विकास की प्रक्रिया में किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

पिंटू पाल ने कहा कि यदि विकास के नाम पर किसानों की जमीन ली जाती है तो उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य और नियमानुसार मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों की समस्याओं को सुनकर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान और व्यापारी सहित समाज के अन्य वर्ग भी विकास चाहते हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं चाहते जिसमें उनका घर, रोजगार या आजीविका प्रभावित हो और उनकी बात सुने बिना निर्णय ले लिया जाए।

देर रात डिटेन किए जाने के मामले पर उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की आवाज उठाने की कीमत पुलिस कार्रवाई है तो भी वह पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि किसानों के मुद्दे किसी एक व्यक्ति के नहीं बल्कि हजारों परिवारों से जुड़े हुए हैं। इसलिए उनकी आवाज को दबाने का प्रयास सफल नहीं होगा।

उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में कानून अपने हाथ में न लें और शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि किसानों की एकजुटता उनकी सबसे बड़ी ताकत है और लोकतंत्र में अपनी बात रखने का सबसे मजबूत माध्यम शांतिपूर्ण संघर्ष है।

पिंटू पाल ने कहा कि किसान नेता के रूप में उनका प्रयास रहेगा कि किसानों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि वह किसी पद या व्यक्तिगत लाभ के लिए किसानों के बीच नहीं हैं, बल्कि किसानों के अधिकार और सम्मान को लेकर अपनी आवाज उठाते हैं।

उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन भी जनता की सेवा के लिए है। इसलिए जनता और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा होने के बजाय संवाद की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। किसानों की समस्याओं को समय रहते सुना जाएगा तो आंदोलन या विरोध की परिस्थितियां भी कम होंगी। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया जाए।

किसान नेता ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज का भी सम्मान होना चाहिए। सरकार और प्रशासन से सवाल करना लोकतंत्र को कमजोर करना नहीं बल्कि उसे मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों को लेकर उनकी आवाज आगे भी जारी रहेगी और किसी दबाव में वह अपनी बात कहना बंद नहीं करेंगे।

उन्होंने अपने समर्थकों और किसानों से कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने का सवाल नहीं है।पिंटू पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “नहीं डरेंगे, नहीं झुकेंगे, अपने अधिकारों को लेकर रहेंगे।”

 उन्होंने कहा कि किसान की आवाज को किसी भी प्रकार के दबाव से खत्म नहीं किया जा सकता। किसान अपने हक और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने अपने संदेश को दोहराते हुए कहा—“किसान की आवाज बुलंद थी, बुलंद है और सदा बुलंद रहेगी।” उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और वह हर मंच पर किसानों की समस्याओं को मजबूती के साथ उठाते रहेंगे।

उन्होंने अंत में कहा कि किसानों के हितों की लड़ाई किसी एक दिन या एक घटना तक सीमित नहीं है। जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक उनकी आवाज उठती रहेगी। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने, शांतिपूर्ण संघर्ष करने और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास बनाए रखने की अपील की। “नहीं डरेंगे, नहीं झुकेंगे, अपने अधिकारों के खातिर अनवरत लड़ते रहेंगे। किसान की आवाज बुलंद थी, बुलंद है और सदा बुलंद रहेगी।”

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