पत्रकार देश की आज़ादी में और आजादी के बाद भी जन आंदोलन की आवाज है: दिनेश चन्द्र

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पत्रकारिता करना जान जोख़िम में डालना हो गया है

हिंदी की पत्रकारिता ने लोकतंत्र को जीवित रखा है

चन्दौली। हिंदी हमारी मातृभाषा ही नही बल्कि संवैधानिक रूप से देश की राजभाषा है और हम समस्त भारतीयों द्वारा आत्मसात स्वघोषित राष्ट्रभाषा है। देश के हम नागरिकों का नैतिक उत्तरदायित्व है कि हम अपनी हिंदी के संवर्धन, उसके प्रयोग ,प्रचार-प्रसार और विकास में योगदान कर राष्ट्रनिर्माण में भागीदार हो जिसकी एक भाषा हो। इसमे कोई संदेह नही की आज़ादी के बाद इस दिशा में जितना कार्य होना चाहिए था ,उतना नही हो सका। 




फोटो: दिनेश चन्द्र (पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी पूर्व मध्य रेलवे डीडीयू नगर चन्दौली)



उसकी एक वजह यह भी रही है कि हमारे मन मे कही न कही अपने भाषा के प्रति नकारात्मक सोच और उपेक्षा के भी भाव रहे है। जिसके चलते इसको शासकीय और राजनैतिक बल नही मिला।जब कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हमे इस बात को समझना होगा। हिंदी की उपेक्षा कर हम अपने राष्ट्र निर्माण और विकास की कल्पना नही कर सकते हैं।


आज़ादी की लड़ाई में उसके उपरांत राष्ट्र निर्माण में हिंदी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, पर्चो, पोस्टरों और हिंदी साहित्य ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पत्रकार का जीवन हमेशा से एक कठिन जीवन रहा है। कलम के सिपाहियों की जान हमेशा जोखिम में रही है। हिंदी पत्रकारिता से जुड़े पत्रकार जब भी आम आदमी की पीड़ा , उनका दुख-दर्द, भ्रष्टाचार, अन्याय और शोषण के खिलाफ लिखा है तब तब देश मे आंदोलन खड़े हो गए और सबसे पहले वह पत्रकार टारगेट किये गए जिन्होंने ऐसी खबरों को लिखा। 

 
अंग्रेजी में लिखी और कही गयी बातें को तो दो , चार दिन तक उसके माने मतलब और अर्थ निकालने में ही गुजर जाते है और जब तक बात समझ मे आये तब तक आम आदमी का दर्द अपने आप दवा बन चुका होता है। इसलिए मेरा मानना है कि भावनाओ से जुड़ी भाषा की सही समय से की गई अभिव्यक्ति वेदना हर लेती है। इसलिए हिंदी जगत से जुड़े पत्रकार बधाई के पात्र है जो मानवीय संवेदनाओं के संवाहक है।
  

अन्त में उन्होंने हिंदी के पत्रकारिता जगत में जुड़े समाचार पत्र, पत्रिकाओं के सभी संपादक मंडल, पत्रकार बन्धु,प्रकाशन से जुड़े लोग और वह जिनके चलते बिना बोहनी के घरों तक खबर पहुँचाने वाले वितरक वन्धुओ को उनके स्वस्थ और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करता किया।

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