भारत भारती के माथे की बिंदी है हिंदी- डायट प्राचार्य

विदेशी कंपनियां भी हिन्दी भाषा में तैयार कर रही साफ्टवेयर-प्रो.प्रदीप पाण्डेय
समय के साथ विकसित हो रही है हिन्दी भाषा-डॉ.जितेंद्र यादव
चंदौली,14 सितंबर 2024 शनिवार। हिन्दी भाषा भारत माता की माथे की बिंदी है। यह भारत देश ही नही अपितु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती से उभरी है।खुशी, भावना, व्यथा, और संवेदना की अभिव्यक्ति किसी न किसी रूप में अभिव्यक्त होती है, उसका माध्यम भाषा ही है। यह भाषा ही एक दूसरे को जोड़ती है और स्वस्थ समाज का निर्माण करती है। अनेक बोली-भाषा के बीच बहुतायत बोली जाने वाली भाषा ‘हिंदी’ को स्वतंत्र भारत में 14 सितंबर ,1949 को राजभाषा का संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। तब से यह दिन ‘हिंदी दिवस’ का दिन हो गया। आज दुनिया मे सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी ही हमारे देश की एकता और अखण्डता की सूत्रधार है। इसमें सृजन और इसका संवर्धन ही राष्ट्र के विकास के पहिये को गति देगा। यह बात सकलडीहा डायट प्राचार्य विकायल भारती ने शनिवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर कहा।
वहीं सकलडीहा पी जी कालेज सकलडीहा मे इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि वैश्विक दौर में हिंदी बाजार की भाषा बन चुकी है। विदेशी कंपनियां भी हिंदी भाषा में अपने सॉफ्टवेयर का निर्माण कर रही हैं। स्वतंत्रता संग्राम के समय इसी भाषा के माध्यम से अलग अलग प्रांत के नेताओं ने आंदोलन चलाया।भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य हिंदी भाषा करती है।
फोटो- सकलडीहा पी जी कालेज सकलडीहा मे हिन्दी दिवस पर चर्चा करते हुए प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय
डॉ.जितेंद्र यादव ने कहा कि हिंदी भाषा समय के साथ विकसित हो रही है। इसे ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में और भी विकसित करने की जरूरत है। ताकि वैश्विक स्तर पर मजबूती मिले। कार्यक्रम का संचालन यज्ञनाथ पांडेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इंद्रजीत सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो.विजेंद्र सिंह, प्रो.शमीम राईन, डॉ.राजेश कुमार यादव, डॉ.अजय कुमार यादव, डॉ.उमेश चतुर्वेदी सहित छात्र छात्रायें मौजूद रही।
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