विशेषरपुर जर्जर पुलिया और टूटी सड़कें

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ग्रामीणों का सब्र का बांध टूटने को तैयार, चक्का जाम की धमकी

चंदौली जिले के नौगढ़ के विशेषरपुर और जनकपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में सिंचाई विभाग की लापरवाही ने लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। जर्जर पुलियों और खस्ताहाल सड़कों से परेशान ग्रामीण अब चक्का जाम करने को आमादा हैं। बरसात से पहले मरम्मत न हुई तो सड़कें जाम कर जेल जाने को तैयार बैठे हैं ग्रामीण।

विशेषरपुर की पुलिया: तीन साल से जर्जर, बाढ़ ने उड़ा दी नींव
 प्राथमिक विद्यालय विशेषरपुर मुसहर बस्ती के सामने कूड़ा राजवाहा नहर पर बनी पुलिया को सिंचाई विभाग ने तीन साल पहले ही जर्जर घोषित कर दिया था। लेकिन 27 जुलाई 2025 को आई तेज बाढ़ ने इसे पूरी तरह जमींदोज कर दिया। भीम आर्मी भारत एकता मिशन के जिलाध्यक्ष राम चन्द्र राम ने प्रदर्शन कर समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए इसकी सूचना प्रशासन तक पहुंचाई, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसकी भयावहता तब सामने आई जब 19 मार्च 2026 को सुबह करीब 8:15 बजे दिलीप पाल (पिता: राम नरेश पाल) मोटरसाइकिल सहित पुलिया में गिर पड़े। उनका पेट फट गया, अग्न्याशय चोटिल हो गया। रोबर्ट्सगंज पीएचसी से वाराणसी रेफर किया गया, जहां साई मैट्रिसिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत से ऑपरेशन कर जान बचाई। यह हादसा चेतावनी है कि लापरवाही कब किसी की जान ले ले, कहा नहीं जा सकता।

फोटो: रामचंद्र राम भीम आर्मी जिलाध्यक्ष घायल दिलीप पाल का कुशल क्षेम जानते हुए 

 
ग्रामीणों की रोजमर्रा की जद्दोजहद: स्कूल, खेत, घर सब दूर
बच्चों का स्कूल सफर: पुलिया न होने से स्कूली बच्चों को 2.5-3 किमी लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। पुल बन जाता तो दूरी महज 20-50 मीटर रह जाती।
किसानों की परेशानी: खेतों तक पहुंचना मुश्किल, समय पर सिंचाई और काम प्रभावित। ग्रामीण घर आने-जाने के लिए दूर घूमते हैं। जल्दबाजी में बच्चे, महिलाएं और पुरुष गिरकर घायल हो जाते हैं।
जनकपुर की CC रोड: जयमोहनी माइनर पर छोटू चमार के घर से आने-जाने वाली रोड भी जर्जर। जगह-जगह कटाव से ग्रामीण रोज गिर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अफसर मौन साधे हैं, खबरें प्रशासन तक नहीं पहुंचा रहे। सरकार की ‘विकास की सौगातें’ खोखली साबित हो रही हैं—कान में तेल, आंखों पर पट्टी बांधे अधिकारी आनंद ले रहे हैं।
प्रशासन की उदासीनता: शिकायतें बेकार, अब चक्का जाम का ऐलान
राम चन्द्र राम ने 4 अप्रैल 2026 को सम्पूर्ण समाधान दिवस पर डीएम चंदौली को अवगत कराया। 6 अप्रैल को IGR सिस्टम पर शिकायत दर्ज की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं! जगह-जगह कटाव वाली सड़कें खतरे में हैं, मगर अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
अब ग्रामीणों ने ठान लिया है—बरसात से पहले पुलिया और सड़कें न बनीं तो चक्का जाम करेंगे, चाहे जेल जाना पड़े। यह सिर्फ असुविधा नहीं, जीवन का सवाल है। प्रशासन जागे, वरना आंदोलन की चिंगारी भड़क सकती है!

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