वाराणसी। प्रयागराज के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आरोपित प्रदीप कुमार को कोर्ट से राहत मिल गयी। शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के बाद पुनः आर्डरशीट में छेड़छाड़ कर भ्रष्टाचार करने के मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम द्वितीय) रजत वर्मा की अदालत ने आरोपित को एक-एक लाख रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नदीम खान व अनुराग सिंह ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सीबीसीआईडी द्वारा राम किशोर यादव के राइफल व रिवाल्वर के लासेंस के निरस्तीकरण के संबंध में पांच जनवरी 2012 को जांच की गयी थी। जांच में पाया गया था कि प्रयागराज जनपद में अपर जिलाधिकारी (नगर) के न्यायालय में लंबित वाद में 6 अप्रैल 2010 को आर्डरशीट में उक्त दोनों मुकदमों में आदेश पारित किया गया और विपक्षी का लाइसेंस संख्या 551/83 व 1205 थाना धूमनगंज, इलाहाबाद निरस्त किया गया। लेकिन बाद में लाइसेन्सी रामकिशोर यादव को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 6 अप्रैल 2010 के आर्डर शीट पर पेस्टिंग करते हुए पत्रावली को आगे लंबित रखा गया और मुकदमे को पुनः बहस में लगा दिया गया और बाद में लाइसेन्सी के लाइसेन्स को बहाल रखा गया।

 जबकि 6 अप्रैल 2010 की आर्डरशीट में यह अंकित है कि लाइसेन्सी का लाइसेन्स निरस्त किया जाता है। इस मामले में पेशकार सुरेश कुमार ने अपने बयान में कहा था कि उक्त आर्डरशीट पीठासीन अधिकारी के निर्देश पर लिखी गयी है। पेशकार सुरेश कुमार को विना आदेश पारित हुए यह कैसे मालूम हो गया कि लाइसेन्सी का लाइसेन्स निरस्त कर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि आदेश पूर्णरूपेण पारित कर दिया गया था। 
वाद में लाइसेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पीठासीन अधिकारी प्रदीप कुमार व पेशकार सुरेश कुमार ने आपसी षड़यंत्र करके सुनियोजित ढंग से 6 अप्रैल 2010 को उक्त मुकदमे की आर्डरशीट पर पेस्टिंग करके मुकदमे को चालू रखा व बाद में पीठासीन अधिकारी प्रदीप कुमार ने बहाल कर दिया। जिसके बाद तत्कालीन पीठासीन अधिकारी प्रदीप कुमार के खिलाफ इस मामले में प्रयागराज जनपद के कर्नलगंज थाने में भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *