ग्राफ्टेड बैंगन से बढ़ेगी किसानों की आय, कृषि विज्ञान केंद्र में 2200 पौधों का वितरण

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किसान गोष्ठी में वैज्ञानिकों ने बताई ग्राफ्टिंग तकनीक की बारीकियां, 36 किसानों ने लिया प्रशिक्षण
चंदौली। कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली में सोमवार, 31 अगस्त 2026 को किसान गोष्ठी एवं ग्राफ्टेड पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी की एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) परियोजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में करीब 36 किसानों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान किसानों को 2200 ग्राफ्टेड बैंगन के पौधों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन तकनीकों से जोड़ना, फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार करना तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना रहा।

कार्यक्रम में किसानों को ग्राफ्टेड बैंगन के पौधों की उपयोगिता और उनसे होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार पौधे सामान्य पौधों की अपेक्षा मृदा जनित रोगों और विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। इससे फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होने के साथ उत्पादन लागत को नियंत्रित करने तथा किसानों की लाभप्रदता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. ए.बी. सिंह का अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि किसानों को बदलते कृषि परिवेश के अनुरूप आधुनिक तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। सीमित कृषि भूमि में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता बन गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली की पहल पर आयोजित कार्यक्रम में एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना के अन्वेषक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत बहादुर ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ग्राफ्टिंग तकनीक आधुनिक और टिकाऊ सब्जी उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके माध्यम से पौधों की वृद्धि और उत्पादन क्षमता में सुधार के साथ मृदा जनित रोगों तथा प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

उन्होंने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के चयन, उचित रोपण विधि, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और पौधों की नियमित निगरानी के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से किसानों को सावधान किया कि ग्राफ्टेड पौधों की रोपाई करते समय ग्राफ्ट यूनियन मिट्टी के संपर्क में नहीं आना चाहिए। यदि ग्राफ्ट यूनियन मिट्टी के अंदर चला जाता है तो पौधे की रोग सहनशीलता और ग्राफ्टिंग से मिलने वाले अन्य लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
डॉ. अनंत बहादुर ने कहा कि वैज्ञानिक प्रबंधन और उचित तकनीक के साथ ग्राफ्टेड सब्जियों की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बन सकती है। इसके साथ ही ग्राफ्टिंग तकनीक कृषि क्षेत्र में उद्यमिता और स्वरोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा कर सकती है। किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी देकर उसे खेत तक पहुंचाना कृषि की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने किसानों से ग्राफ्टेड पौध तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान स्वयं इस तकनीक को अपनाने के साथ इसके लाभों की जानकारी आसपास के अन्य किसानों तक भी पहुंचाएं। आधुनिक कृषि तकनीकों का खेत स्तर पर व्यापक प्रसार कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान शोधकर्ता अनीष कुमार सिंह ने किसानों को ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधि, ग्राफ्टेड पौधों की देखभाल, रोपण प्रबंधन, पोषण एवं सिंचाई प्रबंधन तथा व्यावसायिक सब्जी उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को खेत में पौधों की बेहतर स्थापना के लिए आवश्यक व्यावहारिक सुझाव भी दिए। वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्राफ्टेड पौधों की सफलता केवल पौध उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोपाई के बाद उचित देखभाल, सिंचाई, पोषण और रोग प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में वैज्ञानिक उद्यान श्री मनीष सिंह तथा डॉ. अभयदीप गौतम ने भी किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के रख-रखाव और बेहतर उत्पादन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पौधों की स्थिति की नियमित निगरानी करते रहें और किसी भी प्रकार के रोग या असामान्य वृद्धि के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते वैज्ञानिकों से सलाह लें।
इस दौरान डॉ. प्रतीक सिंह सहित किसानों ने ग्राफ्टेड पौध तकनीक से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं और खेती में आने वाली समस्याएं वैज्ञानिकों के सामने रखीं। वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। किसानों ने ग्राफ्टेड बैंगन के पौधों और आधुनिक उत्पादन तकनीक में विशेष रुचि दिखाई।
किसानों ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ यदि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया जाए तो कम भूमि और उपलब्ध संसाधनों में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। ग्राफ्टेड पौध तकनीक के संबंध में दी गई जानकारी को

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