करोड़ों का मेडिकल कॉलेज, मुख्य गेट पर अंधेरा

बिहार बॉर्डर से सटे नौबतपुर में रात को सुरक्षा गार्डों के लिए चुनौती, दिन में गर्मी और रात में अंधेरे में ड्यूटी
नौबतपुर/सैयदराजा, चंदौली। बिहार सीमा से सटे नौबतपुर स्थित बाबा कीनाराम राजकीय मेडिकल कॉलेज के मुख्य प्रवेश द्वार पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से रात के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज में मेडिकल छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य अधिकृत लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में मुख्य गेट पर अंधेरा रहना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कमी माना जा रहा है।
मैदानी स्थिति यह है कि शाम ढलने के बाद मुख्य गेट के आसपास पर्याप्त रोशनी नहीं होने से अंधेरा छा जाता है। इसी स्थान पर सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी रहती है। उन्हें रात में आने-जाने वाले लोगों और वाहनों पर नजर रखने के साथ मुख्य प्रवेश द्वार की निगरानी करनी पड़ती है। पर्याप्त प्रकाश नहीं होने के कारण यह जिम्मेदारी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज बिहार बॉर्डर के नजदीक स्थित है। सीमा क्षेत्र होने के कारण रात में बाहरी लोगों अथवा असामाजिक गतिविधियों को लेकर सुरक्षा की अतिरिक्त सतर्कता जरूरी मानी जाती है। हालांकि, परिसर में अराजक तत्वों या आपराधिक गतिविधियों की मौजूदगी की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा कर्मियों का अंधेरे में ड्यूटी करना अपने आप में चिंता का विषय है।
रात में अंधेरा, दिन में गर्मी
सुरक्षा कर्मियों के लिए समस्या केवल रात के अंधेरे तक सीमित नहीं है। दिन के समय मुख्य गेट पर लगातार ड्यूटी के दौरान तेज गर्मी का सामना करना पड़ता है। वहीं रात होते ही पर्याप्त प्रकाश के अभाव में निगरानी करना मुश्किल हो जाता है।
बॉर्डर क्षेत्र और अपेक्षाकृत खुले परिसर के कारण रात में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं और जानवरों के आने की आशंका से भी सुरक्षा कर्मियों में भय बना रहता है। अंधेरे में सांप या अन्य विषैले जीव-जंतु का भय बना रहता है, पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, अभी तक किसी विषैले जीव के पाए जाने की विशिष्ट घटना की पुष्टि नहीं हुई है।
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा भी अहम
यह मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा का संस्थान है। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अलावा शिक्षक, कर्मचारी और अन्य अधिकृत लोगों की आवाजाही होती है। कई शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां दिन के अलावा शाम तक चलती हैं। ऐसे में मुख्य गेट से परिसर में प्रवेश और बाहर निकलने वाले लोगों के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था जरूरी है।
मुख्य गेट सुरक्षा व्यवस्था की पहली कड़ी होता है। पर्याप्त रोशनी होने से सुरक्षा गार्ड आने-जाने वाले लोगों और वाहनों को आसानी से देख और पहचान सकते हैं। साथ ही परिसर के प्रवेश और निकास पर निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सकती है।
बड़े संस्थान में बुनियादी सुविधा का सवाल
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस राजकीय मेडिकल कॉलेज को क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे संस्थान में भवन, कक्षाओं और शैक्षणिक संसाधनों के साथ सुरक्षा एवं प्रकाश व्यवस्था भी प्राथमिकता में होनी चाहिए।
मुख्य गेट पर प्रकाश की कमी को लेकर सवाल यह है कि जब सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है तो उन्हें रात में पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। यदि मुख्य गेट पर हाई-मास्ट लाइट, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट अथवा अन्य उपयुक्त प्रकाश व्यवस्था कर दी जाए तो सुरक्षा कर्मियों के साथ छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को भी सुविधा मिलेगी।
फिलहाल स्थिति ऐसी है कि दिन में सुरक्षा कर्मियों को गर्मी का सामना करना पड़ता है और रात में अंधेरे में ड्यूटी निभानी पड़ रही है। बिहार सीमा से सटे इस महत्वपूर्ण मेडिकल शिक्षण संस्थान के मुख्य गेट पर प्रकाश व्यवस्था की कमी को दूर करना सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम माना जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से इस समस्या पर क्या कार्रवाई की जा रही है और मुख्य गेट पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था कब तक होगी, इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।