भारत बंद के समर्थन में नीले बैनर तले सड़क पर उतरे कई क्षेत्रीय दल

राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा
एससी-एसटी आरक्षण के वर्गीकरण कानून को वापस लेने और एससी-एसटी आरक्षण को संविधान की 9वीं सूची में डालने का मांग किया।
दिल्ली। भारत बंद 21 अगस्त 2024 को आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति समेत कई संगठनों के आह्वान पर हुआ है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में बंद का आयोजन किया गया है. इस बंद में कई राजनीतिक दलों का समर्थन रहा है, जिनमें प्रमुख रूप से बहुजन समाज पार्टी (BSP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), और कई क्षेत्रीय दल शामिल रहे.
संविधान में छेड़छाड़ बंद करो, आरक्षण कोटा पूरा करो वरना कुर्सी खाली करो, जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी, क्रिमिलेयर एवं वर्गीकरण आदेश वापस कराओ, निजी संस्थानों में आरक्षण लागू करो, इत्यादि नारों के साथ आरक्षण मे वर्गीकरण का विरोध किया।
इन दलों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आरक्षण के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इसे वापस लेने और एससी-एसटी आरक्षण को संविधान की 9वीं सूची में डालने का मांग किया। बता दें कि मांस और शराब की दुकानों पर भी बंद का असर पड़ा।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति समेत कई संगठनों ने 21 अगस्त 2024 को भारत बंद का रखा. इस बंद का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का विरोध करना था. जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति (एससी/एसटी) के भीतर उप-श्रेणियाँ बनाने की अनुमति दी गई है. यह फैसला देश भर में विवाद का विषय बना हुआ है, विरोध करने वालों का मानना है कि इससे आरक्षण व्यवस्था के मौलिक सिद्धांतों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.
देशव्यापी बंद का क्या है कारण?
भारत बंद का आयोजन आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के द्वारा किया गया है, जिसमें देश के कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी शामिल हो गए हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), समाजवादी पार्टी (SP), और कुछ अन्य क्षेत्रीय दल इस बंद का समर्थन कर रहे हैं. इन दलों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आरक्षण के लिए तय किए गए मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है, जिससे समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को नुकसान हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया है कि वे एससी/एसटी समूहों के भीतर उप-श्रेणियाँ बना सकती हैं, ताकि सबसे जरूरतमंद को आरक्षण में प्राथमिकता मिल सके. हालांकि, इस फैसले के बाद कई संगठनों ने इसे आरक्षण नीति के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया है. उनका कहना है कि इस फैसले से आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और सामाजिक न्याय की धारणा कमजोर हो जाएगी.
कानून व्यवस्था प्रमुख सवाल
भारत बंद के चलते देश के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में विशेषकर इस बंद का व्यापक असर दिखा है. कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए रहे और पुलिस बल को हाई अलर्ट पर रखा गया था.
दलित संगठनों की क्या रही मांगे?
देश के विभिन्न दलित संगठन कोर्ट के इस फैसले का विरोध किए है. दलित राजनीति से जुड़े कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का मानना है कि यह आरक्षण के सिद्धांतों को कमजोर करता है. भारत बंद का उद्देश्य इस फैसले को चुनौती देना और इसे वापस लेने की मांग किया है.
कौन-कौन सी पार्टियां बंद का समर्थन की?
देशभर के दलित संगठनों के साथ साथ कई राजनीतिक दलों ने भी इस बंद को सर्थन दिया . बहुजन समाजवादी पार्टी भीम आर्मी, भारत आदिवासी पार्टी सहित कई दल इसका समर्थन किया. साथ ही कांग्रेस, आरजेडी समेत कई अन्य पार्टियाँ भी बंद का समर्थन किया.
भारत बंद के दौरान क्या खुला रहा?
बंद के दौरान, अस्पताल और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से चालू रही. सरकारी दफ्तर, स्कूल-कॉलेज, और बैंक भी खुले रहे, मांस और शराब की दुकानों पर भी बंद का असर पड़ा। जो लोगों कि प्राथमिक चिंताओं में से एक है. हालाँकि, यह अनुमान है कि कई दुकान मालिक एहतियात के तौर पर अपना व्यवसाय बंद रखा.
आपातकालीन सेवाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, और नागरिकों को इन सेवाओं का लाभ मिलता रहा. हालांकि, भारत बंद का देश के विभिन्न हिस्सों पर असर देखने को मिला है, लेकिन कुछ जरूरी सेवाएं बिना बाधा के जारी रही। जैसे-एम्बुलेंस सेवाएँ, सरकारी दफ्तर, स्कूल-कॉलेज, बैंक, आपातकालीन सेवाएँ, अस्पताल और चिकित्सा सेवाएँ, पुलिस सेवाएँ और फ़ार्मेसी