लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति परखने के लिए विशेष औचक निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारियों की टीमें बिना पूर्व सूचना स्कूलों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन करेंगी। निरीक्षण में शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील, पेयजल, शौचालय, बिजली, किताबों के वितरण और कक्षा में पढ़ाई के स्तर समेत कई बिंदुओं की जांच की जाएगी।

अभियान का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। अचानक निरीक्षण होने से स्कूलों में रोजमर्रा की व्यवस्था को बिना पूर्व तैयारी के परखा जा सकेगा।
शिक्षकों की उपस्थिति पर रहेगी नजर
औचक निरीक्षण के दौरान सबसे प्रमुख रूप से शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति देखी जाएगी। टीम यह जांच करेगी कि शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंच रहे हैं या नहीं और विद्यालय संचालन के दौरान उनकी मौजूदगी बनी रहती है या नहीं। बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की स्थिति भी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज की जाएगी।

मिड-डे मील की गुणवत्ता भी जांचेगी टीम
स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी जांच के दायरे में रहेगी। निरीक्षण टीम भोजन की गुणवत्ता, वितरण की व्यवस्था और बच्चों को निर्धारित भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी लेगी। इसके साथ ही स्कूल में भोजन से संबंधित व्यवस्था को भी मौके पर देखा जाएगा।
पानी, शौचालय और बिजली का होगा भौतिक सत्यापन
सरकारी स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी मौके पर जांची जाएगी। साफ पेयजल की उपलब्धता, शौचालयों की स्थिति और बिजली की व्यवस्था को केवल रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर देखा जाएगा।
इस दौरान यह भी सामने आएगा कि स्कूल में उपलब्ध सुविधाएं वास्तव में बच्चों और शिक्षकों के उपयोग के लायक हैं या नहीं। खराब या अनुपयोगी सुविधाओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
किताबों और पढ़ाई के स्तर की होगी समीक्षा
निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से संबंधित रिकॉर्ड, पुस्तकों के वितरण और कक्षा में चल रही पढ़ाई की स्थिति भी देखी जाएगी। टीम यह जानने का प्रयास करेगी कि विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई जा रही है या नहीं और बच्चों की शैक्षणिक प्रगति कैसी है।
इस तरह निरीक्षण केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को जांच के दायरे में रखा जाएगा।
बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी सख्ती
स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियोग्राफी को लेकर भी कई जिलों में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की निजता, सुरक्षा और शिक्षण व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बिना अनुमति यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और अन्य बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा रही है।
ऐसे में स्कूलों की व्यवस्थाओं की जांच के लिए अधिकृत सरकारी अधिकारियों और निरीक्षण टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बिना पूर्व सूचना सरकारी टीमों के पहुंचने से स्कूल की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मान्यता विहीन स्कूलों पर भी कार्रवाई
इसके साथ ही प्रदेश में बिना मान्यता संचालित हो रहे स्कूलों और निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे संस्थानों की जांच कर नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जा रही है।
सरकार की ओर से चलाए जा रहे इन प्रयासों का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। औचक निरीक्षण के जरिए स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने आने के बाद संबंधित कमियों को दूर करने की दिशा में कार्रवाई की जा सकेगी।