सकलडीहा समाधान दिवस में डीएम-एसपी नदारद, मायूस लौटे फरियादी; लेखपालों का प्रदर्शन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र पर गरमाया मामला

सकलडीहा समाधान दिवस में डीएम-एसपी की गैरमौजूदगी से कुछ फरियादी मायूस लौटे। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपालों के प्रदर्शन से राजस्व कार्य प्रभावित रहे, जबकि अधिवक्ताओं ने 30 सितंबर तक किए गए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के लंबित आवेदनों के निस्तारण की मांग उठाई। लेखपालों ने मांगें पूरी न होने पर 8, 17 और 24 अक्टूबर से आंदोलन के अलग-अलग चरण शुरू करने की चेतावनी दी।

चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम और एसपी के नहीं पहुंचने से दूर-दराज से आए कई फरियादी मायूस होकर लौट गए। वहीं आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपालों ने जिलाध्यक्ष बिनय कुमार सिंह के नेतृत्व में सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया, जिससे राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित रहे। लेखपालों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने की चेतावनी दी। दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने एक अक्टूबर 2026 से लागू जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र की नई प्रक्रिया के बीच 30 सितंबर तक किए गए लंबित आवेदनों का निस्तारण नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए विरोध जताया।

शनिवार को सकलडीहा तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में विभिन्न क्षेत्रों से लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। लोगों को उम्मीद थी कि जिला स्तरीय अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखने से उनका जल्द समाधान होगा। हालांकि डीएम और एसपी के मौजूद नहीं रहने पर एसडीएम, तहसीलदार समेत तहसील स्तर के अन्य अधिकारियों ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं।

समाधान दिवस में राजस्व, भूमि विवाद, रास्ते, कब्जे और अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें अधिकारियों के सामने रखी गईं। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को शिकायतों की जांच कर नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए। लेकिन राजस्व संबंधी मामलों में लेखपालों के अतिरिक्त कार्य बहिष्कार का असर दिखाई दिया।

आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपालों का प्रदर्शन

तहसील परिसर में लेखपालों ने अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष बिनय कुमार सिंह के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में लेखपालों ने स्थानांतरण, वेतन विसंगति और भत्तों में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया।

लेखपालों के अतिरिक्त कार्य बहिष्कार के चलते राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई। समाधान दिवस में राजस्व मामलों के निस्तारण की उम्मीद लेकर पहुंचे फरियादियों को भी इसका सामना करना पड़ा। कुछ लोग अपनी शिकायतें दर्ज कराने के बाद संबंधित कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने से निराश नजर आए।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा तेज

लेखपालों ने स्पष्ट किया कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। चेतावनी के अनुसार आठ अक्टूबर से ऑनलाइन कार्य बंद किया जाएगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से पांच दिनों तक तहसील स्तर पर धरना दिया जाएगा। वहीं 24 अक्टूबर से जिले में पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।

लेखपालों के इस ऐलान के बाद राजस्व कार्यों को लेकर आगे की स्थिति पर भी लोगों की नजर बनी हुई है। विशेष रूप से भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों के लिए तहसील आने वाले लोगों को कार्य बहिष्कार बढ़ने की स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के पुराने आवेदन लंबित

समाधान दिवस में अधिवक्ताओं ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी विरोध जताया। उनका कहना था कि एक अक्टूबर 2026 से प्रमाण पत्र जारी करने की नई प्रक्रिया लागू की गई है, लेकिन 30 सितंबर से पहले किए गए कई आवेदन अभी तक लंबित पड़े हैं।

अधिवक्ताओं के मुताबिक पुराने आवेदनों का निस्तारण नहीं होने से आवेदनकर्ताओं को परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि 30 सितंबर तक किए गए लंबित आवेदनों को भी नियमानुसार निस्तारित किया जाए, ताकि पहले से आवेदन कर चुके लोगों को नए नियम लागू होने के कारण परेशानी न उठानी पड़े।

बड़े अधिकारियों के नहीं आने से फरियादियों में मायूसी

समाधान दिवस में डीएम और एसपी की अनुपस्थिति को लेकर कुछ फरियादियों में मायूसी दिखाई दी। दूर-दराज से आए लोग अपनी समस्याएं जिला स्तरीय अधिकारियों के सामने रखना चाहते थे। हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए।

संपूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों को एक ही स्थान पर सुनकर उनका समयबद्ध समाधान कराना है। ऐसे में फरियादियों की समस्याओं के निस्तारण के साथ राजस्व कर्मियों के आंदोलन और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के लंबित मामलों का समाधान भी तहसील प्रशासन के सामने अहम मुद्दा बना रहा।