डीडीयू मंडल में रेल परिचालन को मिलेगी रफ्तार, 70.82% पूंजीगत बजट खर्च
डीडीयू मंडल में पहली छमाही के दौरान 87 रूट किलोमीटर में कवच और 47.50 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग चालू की गई। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का विस्तार 41 स्टेशनों तक पहुंचा। सितंबर 2026 तक 371.84 करोड़ रुपये के पूंजीगत बजट में से 263.34 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
चंदौली। पूर्व मध्य रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल में रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने के लिए सिग्नलिंग व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 87 रूट किलोमीटर में कवच प्रणाली और 47.50 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग चालू की गई। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का विस्तार 41 स्टेशनों तक पहुंच गया है। सितंबर 2026 तक मंडल के पूंजीगत बजट का 70.82 प्रतिशत उपयोग किया जा चुका है।

ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का विस्तार
चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में भभुआ रोड–सासाराम रेलखंड पर 47.50 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली चालू की गई। वहीं, डीडीयू–मानपुर ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड के कुल 214 रूट किलोमीटर में से अब तक 164.28 रूट किलोमीटर में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।
इस तकनीक से रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। निर्धारित सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक ही दिशा में अधिक ट्रेनों के परिचालन की क्षमता बढ़ाने में यह प्रणाली सहायक होती है। इससे मौजूदा रेल अवसंरचना का बेहतर उपयोग करने और ट्रेन संरक्षा को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
41 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
सिग्नलिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने के क्रम में मुठानी और कुम्हऊ स्टेशनों पर पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली चालू की गई। इसके साथ डीडीयू मंडल में इस तकनीक से लैस स्टेशनों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। ग्रैंड कॉर्ड और बीडी सेक्शन में भी इससे संबंधित कार्य पूरा किया जा चुका है।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कंप्यूटर आधारित तकनीक है, जो सिग्नलों और रेलमार्गों के बीच निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार समन्वय स्थापित करती है। यह परस्पर विरोधी रेलमार्गों को एक साथ निर्धारित होने से रोकने में मदद करती है। इससे सिग्नलिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ती है और ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।
87 रूट किलोमीटर में कवच प्रणाली चालू
ट्रेन संरक्षा को मजबूत करने के लिए गंजख्वाजा–भभुआ रोड और सासाराम–फेसर रेलखंडों पर कुल 87 रूट किलोमीटर में कवच प्रणाली की कमीशनिंग की गई। मंडल में इसके विस्तार का कार्य जारी है और रेलवे ट्रैक पर इससे संबंधित टैग लगाए जा रहे हैं।
कवच भारतीय रेल की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। निर्धारित परिस्थितियों में यह सिग्नल की अनदेखी कर आगे बढ़ने या तय गति सीमा से अधिक गति होने की स्थिति में लोको पायलट को सहायता देती है। आवश्यकता पड़ने पर यह स्वचालित ब्रेकिंग के जरिए ट्रेन की गति नियंत्रित करने में भी सक्षम है। इससे ट्रेनों के बीच टक्कर के जोखिम को कम करने और परिचालन सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलती है।
25 स्टेशनों पर आधुनिक ट्रेन डिटेक्शन तकनीक
मंडल में ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाने के लिए ड्यूल मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (Dual MSDAC) तकनीक का विस्तार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दो स्टेशनों पर यह प्रणाली स्थापित की गई। इसके साथ अब तक कुल 25 स्टेशनों पर पुराने डीसी ट्रैक सर्किट के स्थान पर इस तकनीक का उपयोग शुरू हो चुका है।
यह प्रणाली एक्सल काउंटर के माध्यम से संबंधित रेलखंड में ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाती है और सिग्नलिंग व्यवस्था को उसकी स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराती है। बरसात के दौरान जलभराव या अन्य कारणों से पारंपरिक ट्रैक सर्किट में आने वाली खराबियों से परिचालन प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में डिजिटल एक्सल काउंटर तकनीक ट्रेन डिटेक्शन व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने और परिचालन में होने वाली देरी कम करने में सहायक है।
डीडीयू–प्रयागराज तीसरी लाइन का कार्य पूरा
डीडीयू–प्रयागराज तीसरी लाइन परियोजना के तहत डीडीयू जंक्शन के न्यू वेस्ट केबिन से डीडीयू मंडल और उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के इंटरचेंज पॉइंट ब्लॉक हट ‘के’ तक नवनिर्मित तीसरी लाइन को सिग्नलिंग व्यवस्था से जोड़कर चालू किया गया। इसके अंतर्गत डीडीयू के न्यू वेस्ट केबिन में नए पैनल इंटरलॉकिंग की कमीशनिंग भी पूरी की गई।
इस कार्य से दोनों रेल मंडलों के बीच ट्रेनों के आदान-प्रदान की क्षमता बढ़ाने और आवागमन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। तीसरी लाइन उपलब्ध होने से संबंधित रेलखंड पर परिचालन प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पूंजीगत बजट का 70.82 प्रतिशत उपयोग
रेल अवसंरचना और संरक्षा संबंधी परियोजनाओं के साथ वित्तीय प्रबंधन पर भी मंडल में जोर दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में लेखा विभाग ने बजट उपयोग की निगरानी और वित्तीय जांच के माध्यम से संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल में योगदान दिया।
सितंबर 2026 तक मंडल को आवंटित 371.84 करोड़ रुपये के वार्षिक पूंजीगत बजट में से 263.34 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह कुल आवंटन का 70.82 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, संशोधित राजस्व बजट में से 1,265.25 करोड़ रुपये यानी 57.57 प्रतिशत का उपयोग किया गया।
मंडल में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 15 स्टेशनों के पुनर्विकास, गया जंक्शन के व्यापक पुनर्विकास तथा विभिन्न संरक्षा और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए बजट उपयोग की नियमित निगरानी की जा रही है। इसका उद्देश्य उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का प्राथमिकता के अनुरूप इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के नेतृत्व में सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग और लेखा विभाग रेल परिचालन की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर ध्यान दे रहे हैं। इन कार्यों से रेल संरक्षा, परिचालन क्षमता और अवसंरचना विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
डीडीयू मंडल में पहली छमाही के दौरान 87 रूट किलोमीटर में कवच और 47.50 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग चालू की गई। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का विस्तार 41 स्टेशनों तक पहुंचा। सितंबर 2026 तक 371.84 करोड़ रुपये के पूंजीगत बजट में से 263.34 करोड़ रुपये खर्च किए गए