चंदौली में अन्नदाताओं पर आफत! बारिश से धान की पकी फसल बर्बाद, पिंटू पाल ने मांगा मुआवजा
कटाई के समय बेमौसम बारिश से धान की फसल गिरने और उपज भीगने पर किसानों की लागत तथा आमदनी प्रभावित होती है। ऐसे में नुकसान का निष्पक्ष सर्वे, खरीद मानकों के अनुरूप राहत और पात्र किसानों को समय पर मुआवजा मिलना जरूरी है।

सकलडीहा (चंदौली)। महीनों की मेहनत और हजारों रुपये खर्च करने के बाद जब धान की फसल घर पहुंचने की तैयारी में थी, तभी बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तेज हवा से खेतों में खड़ी पकी धान की फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि कटी हुई उपज बारिश में भीगने से खराब होने के खतरे में है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान और लागत निकालने की चिंता सताने लगी है। किसान नेता पिंटू पाल ने जिला प्रशासन से फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
थाली तक पहुंचने से पहले छिन गया निवाला
किसान नेता पिंटू पाल ने किसानों का दर्द बयां करते हुए कहा कि धान की फसल थाली में परोसे भोजन की तरह तैयार थी, बस कटाई बाकी थी। लेकिन तेज हवा और बेमौसम बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
उन्होंने कहा कि किसान कर्ज लेकर खाद, बीज और सिंचाई पर खर्च करता है। फसल तैयार होने के बाद जब उसे घर लाने का समय आता है, तब मौसम की मार उसकी पूरी आर्थिक गणित बिगाड़ देती है। बारिश से प्रभावित धान की गुणवत्ता खराब होने पर किसानों को उपज बेचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
एक बीघा खेती में 15 हजार रुपए तक की लागत
पिंटू पाल के मुताबिक, एक बीघा धान की खेती में करीब 15 हजार रुपए तक की लागत आती है। किसान बड़ी उम्मीद के साथ फसल तैयार करता है, लेकिन कटाई से ठीक पहले नुकसान होने पर उसकी मेहनत और पूंजी दोनों पर संकट खड़ा हो जाता है।
सकलडीहा, धानापुर और चहनियां सहित जनपद के पूरे क्षेत्र में धान की फसल को नुकसान होने की बात सामने आई है। खेतों में गिरी फसल की कटाई मुश्किल होने के साथ कटी हुई उपज के भीगने से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, नुकसान का वास्तविक आकलन प्रशासनिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
डीएम से तीन प्रमुख मांगें
किसान नेता पिंटू पाल ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से प्रभावित क्षेत्रों में लेखपालों के माध्यम से तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने किसानों को राहत दिलाने के लिए तीन प्रमुख मांगें उठाई हैं।
- फसल नुकसान का सर्वे: प्रभावित गांवों में लेखपालों से तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का आकलन कराया जाए।
- नमी के मानक में छूट: क्रय केंद्रों पर धान में नमी के निर्धारित मानक में दो से तीन प्रतिशत तक छूट देने की मांग की।
- मुआवजा: प्रभावित किसानों को आपदा राहत कोष से नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
राहत नहीं मिली तो धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
पिंटू पाल ने कहा कि किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में तैयार फसल को नुकसान पहुंचना उनके लिए बड़ी परेशानी है। उन्होंने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर किसानों को राहत दिलाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मुआवजे और राहत के लिए शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो किसान धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।