चंदौली में संविधान दिवस मनाने को लेकर बैठक, 15 नवंबर को कई स्थानों पर होंगी सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं; मेधावी छात्रों को ट्रॉफी, मेडल और पुस्तकें देकर किया जाएगा सम्मानित

वर्ष 2008 से लगातार संविधान दिवस मनाकर लॉर्ड बुद्धा डॉ. अंबेडकर सेवा समिति ने चंदौली में संवैधानिक जागरूकता की एक महत्वपूर्ण परंपरा कायम की है। संविधान के अनुच्छेदों के माध्यम से नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, धार्मिक आजादी, शोषण से मुक्ति और न्याय पाने के अधिकारों की जानकारी देना इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। वहीं मौलिक कर्तव्यों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से लोगों को जोड़ना इसकी सार्थकता बढ़ाता है। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं से नई पीढ़ी में संवैधानिक समझ विकसित होगी, जबकि मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान और बुजुर्गों को कंबल वितरण शिक्षा, सम्मान और सामाजिक सहयोग का संदेश देगा। यह पहल संविधान को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे जनजीवन में समझने और अपनाने का प्रयास है।

चंदौली। भारतीय संविधान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, नागरिकों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों से परिचित कराने और नई पीढ़ी को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से जोड़ने के उद्देश्य से लॉर्ड बुद्धा डॉ. अंबेडकर सेवा समिति की ओर से संविधान दिवस आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आगामी 15 नवंबर को जिले के कई स्थानों पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को संविधान दिवस के अवसर पर ट्रॉफी, मेडल और पुस्तकें देकर सम्मानित किया जाएगा।

लॉर्ड बुद्धा डॉ. अंबेडकर सेवा समिति वर्ष 2008 से चंदौली में लगातार संविधान दिवस मनाती आ रही है। समिति का यह प्रयास केवल एक वार्षिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से संविधान के मूल उद्देश्यों, सामाजिक समानता, शिक्षा, स्वतंत्रता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष आयोजित कार्यक्रम में विद्वान वक्ताओं के माध्यम से लोगों को संविधान की महत्ता और उसमें निहित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी जाती है, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग अपने अधिकारों और संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझ सके।

कार्यक्रम में भारतीय संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक उल्लिखित मौलिक अधिकारों की विशेष रूप से जानकारी दी जाती है। इसमें अनुच्छेद 14 से 18 के तहत समानता का अधिकार, अनुच्छेद 19 से 22 के तहत स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 23 और 24 के तहत शोषण के विरुद्ध अधिकार, अनुच्छेद 25 से 28 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार तथा अनुच्छेद 29 और 30 के तहत सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इसके साथ ही अनुच्छेद 32 के तहत संवैधानिक उपचारों के अधिकार की जानकारी देकर लोगों को बताया जाता है कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर वे न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

समानता के अधिकार के तहत अनुच्छेद 14 प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता और कानून का समान संरक्षण प्रदान करता है। अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। अनुच्छेद 16 सरकारी सेवाओं में अवसर की समानता सुनिश्चित करता है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता यानी छुआछूत का अंत करता है, जबकि अनुच्छेद 18 सैन्य और शैक्षणिक सम्मानों को छोड़कर उपाधियों के अंत का प्रावधान करता है। इन प्रावधानों के माध्यम से समाज में जातिगत भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध संवैधानिक व्यवस्था की जानकारी दी जाती है।

स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 19 नागरिकों को विचार एवं अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा, संगठन बनाने, देश में स्वतंत्र रूप से घूमने, कहीं भी निवास करने तथा अपनी पसंद का पेशा, व्यवसाय और व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। अनुच्छेद 20 अपराधों के मामलों में नागरिकों को विशेष कानूनी संरक्षण देता है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है। अनुच्छेद 21-क के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और निरोध के मामलों में नागरिकों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इन प्रावधानों के जरिए लोगों को बताया जाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल अपनी इच्छा से जीवन जीना नहीं, बल्कि कानून और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए स्वतंत्रता का उपयोग करना भी है।

शोषण के विरुद्ध अधिकार के तहत अनुच्छेद 23 मानव तस्करी, बेगार और जबरन मजदूरी पर रोक लगाता है। अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों और अन्य खतरनाक रोजगारों में काम पर नहीं लगाया जा सकता। धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म मानने, उसका आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। अनुच्छेद 27 किसी विशेष धर्म के प्रचार के लिए कर देने की बाध्यता से संरक्षण देता है, जबकि अनुच्छेद 28 कुछ शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा और धार्मिक उपासना के संबंध में संवैधानिक व्यवस्था स्पष्ट करता है।

सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकारों के तहत अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी वर्ग को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 30 धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार प्रदान करता है। वहीं अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा और उसके हृदय के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। इसके तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार प्राप्त है। सर्वोच्च न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा जैसी रिट जारी कर सकता है।

कार्यक्रम में केवल मौलिक अधिकारों ही नहीं, बल्कि संविधान के भाग-4 में वर्णित राज्य के नीति-निदेशक तत्वों की भी जानकारी दी जाती है। अनुच्छेद 38 सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने की बात करता है। अनुच्छेद 39 समान आजीविका, संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसे सिद्धांतों से जुड़ा है। अनुच्छेद 39-क समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन, अनुच्छेद 41 काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता, अनुच्छेद 42 मानवीय कार्य दशाओं और प्रसूति सहायता तथा अनुच्छेद 43 श्रमिकों के लिए निर्वाह योग्य वेतन से संबंधित है। अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा, जबकि अनुच्छेद 46 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और कमजोर वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों को बढ़ावा देने की बात करता है। अनुच्छेद 47 पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार पर बल देता है।

इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 51-क में उल्लिखित नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्यों के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाता है। इनमें संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों का पालन करना, देश की एकता एवं अखंडता की रक्षा करना, आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय सेवा देना, सभी नागरिकों में भाईचारा बढ़ाना, महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करना, देश की समन्वित संस्कृति की विरासत को सुरक्षित रखना, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना तथा व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कृष्टता की ओर बढ़ना शामिल है। माता-पिता और अभिभावकों का यह भी कर्तव्य है कि वे 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराएं।

समिति की ओर से संविधान दिवस आयोजन को सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा जाता है। इस अवसर पर बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों को कंबल वितरित किए जाते हैं, ताकि जरूरतमंदों को सर्दी से राहत मिल सके। वहीं कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को लंच पैकेट उपलब्ध कराए जाते हैं। इस पहल के माध्यम से संविधान में निहित समानता, सम्मान, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदना के मूल्यों को व्यवहार में उतारने का संदेश दिया जाता है।

इस वर्ष आयोजन को और व्यापक स्वरूप देने के लिए 15 नवंबर को जिले के कई स्थानों पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं कराने की तैयारी है। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों को भारतीय संविधान, उसके निर्माण, संविधान सभा, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान, मौलिक अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को संविधान दिवस पर ट्रॉफी, मेडल और पुस्तकें देकर सम्मानित किया जाएगा।

इस आयोजन को सफल बनाने में अर्जुन प्रसाद आर्य, एडवोकेट रामजन्म बागी, लल्लन कुमार, आनंद कुमार, एडवोकेट हीरालाल (हाईकोर्ट), एडवोकेट अरुण कुमार, एडवोकेट अरविंद कुमार पंकज, रामसुभाष, वीरेंद्र कुमार भारती, जगदीश लाल और एचएन प्रसाद सहित अन्य लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।