आंदोलन का मील का पत्थर: बौद्ध विहार बचाओ संघर्ष मोर्चा का 181वां दिन

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भाकियू टिकैत का पूर्ण समर्थन, पूर्वांचल स्तर पर एकजुटता का ऐलान
सटीक संवाद | शुक्रवार, 27 मार्च 2026। चंदौली के मिल्कीपुर स्थित तथागत बौद्ध विहार न्यू सारनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट को बचाने के लिए ‘बौद्ध विहार बचाओ संघर्ष मोर्चा’ का आंदोलन अब मील का पत्थर साबित हो रहा है। 28 सितंबर 2025 से शुरू यह धरना आज 181वें दिन प्रवेश कर चुका है। यह संघर्ष मिल्कीपुर, ताहीरपुर सहित आसपास के गांवों की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ है।

भाकियू टिकैत का मजबूत समर्थन
वाराणसी मंडल पंचायत में भाकियू टिकैत के वाराणसी मंडल अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप तिवारी ने धरने को तन-मन-धन से पूर्ण समर्थन का ऐलान किया। पूर्वांचल उपाध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद मौर्य ने कहा, “जरूरत पड़ी तो पूरे पूर्वांचल के पदाधिकारी कंधे-से-कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ेंगे।” युवा जिलाध्यक्ष रंकज सिंह ने चेतावनी भरी, “पूंजीपतियों की सरकार किसानों, मजदूरों व शोषितों को डरा-धमकाकर जमीनें हथियाने पर तुली है। इसके खिलाफ सभी को एकजुट होकर बड़ा आंदोलन चलाना होगा।”
ट्रस्ट की पृष्ठभूमि और निंदा
22 वर्ष पूर्व स्थापित यह ट्रस्ट समाज में कुरीतियों का उन्मूलन, आचार-व्यवहार सुधार और शांति का उपदेश देने के उद्देश्य से कार्यरत है। ट्रस्ट के महामंत्री विद्याधर ने मोर्चा के तीन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं पर धारा 151 के तहत कार्रवाई को निंदनीय बताया। चंदौली जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह, वाराणसी जिलाध्यक्ष कमलेश राजभर तथा जौनपुर जिलाध्यक्ष शैलेश वर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया।
आज का आयोजन
शुक्रवार को दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में नंदलाल विश्वकर्मा, बाबूराम पटेल, दुर्गावती, सुमन देवी, अनिल सिंह, प्रेमा, मीरा, अनीता वैजयंती, शीला, सुमन प्रजापति आदि किसानों ने भाग लिया। अध्यक्षता विद्याधर ने की, जबकि संचालन ललित नारायण मौर्य ने किया। यह घटना उत्तर प्रदेश में भूमि अधिकारों पर बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जहां किसान यूनियनें सामुदायिक ट्रस्टों से जुड़ रही हैं।

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