सड़क दुर्घटना में घायल पुलिसकर्मी को 20. 98 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश

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सनबीम एकेडमी के वाहन से सड़क हादसे में  पुलिसकर्मी का कई जगहों पर टूट गया था पैर 

दवा इलाज में अब तक 15लाख रूपये हो चुके हैं खर्च 

वाराणसी। सनबीम एकेडमी के वाहन से ड्यूटी पर जा रहे पुलिसकर्मी अशोक कुमार शर्मा की हुए दुर्घटना के मामले में पीठासीन अधिकारी (मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण) अश्वनी कुमार दुबे की अदालत ने बीमा कम्पनी को पीड़ित व्यक्ति अशोक कुमार शर्मा को क्षतिपूर्ति के रूप में 7 प्रतिशत व्याज सहित 20 लाख 98 हजार 8 सौ 48 रूपये उसके बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही ढाई लाख रुपये पीड़ित के नाम तीन वर्ष के लिए सावधि जमा योजना के तहत किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत में पीड़ित की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शमीम व बृजेश सिंह ने पक्ष रखा। 



अभियोजन पक्ष के अनुसार इस प्रकार है कि दरोग़ा अशोक कुमार शर्मा 27 दिसम्बर 2008 को जब वह अपने विभागीय कार्य से सी.ओ. अहरोरा (ऑपरेशन) के यहां डाक पहुंचा कर अपने तैनाती पुलिस चौकी राजगढ़ थाना मड़िहान मिर्जापुर अपने मोटर साइकिल से वापस आते समय लगभग 3:45 बजे जैसे ही वह भटेहरा गांव के सामने पहुंचा कि विपरीत दिशा से मिर्जापुर की तरफ सनबीम एकेडमी की बोलेरो गाड़ी का चालक बड़ी तेजी व लापरवाही से आया और गलत दिशा में अपने दाहिने घुस कर याची को जोरदार टक्कर मारा

 जिसके परिणामस्वरूप याची की मोटर साइकिल दुर्घटना कारित करने वाली बोलेरो गाड़ी से कुचल कर फंस गयी और याची बुरी तरह घायल हुआ, उसको शरीर के अन्य भागों में आई चोटों के अलावा उसका बायां पैर कई जगह से टूट गया। 

दुर्घटना के समय याची के पीछे पीछे आ रहे याची के भाई संतोष कुमार सिंह व भतीजा सुनील कुमार सिंह ने दुर्घटना कारित करने वाले गाड़ी को पकड़ने के लिये दौड़ाया, बोलेरो में मोटर साइकिल फंसी होने के कारण चालक घटनास्थल के पास अपनी गाड़ी को छोड़कर भाग गया।

 याची के भाई व भतीजे ने याची को चुनार के एक अस्पताल में ले गये, वहाँ डाक्टर के उपलब्ध न होने के कारण याची को चुनार पी.एच.सी. पहुंचाया गया, जहाँ गंभीर चोटों के कारण डाक्टर ने बी.एच.यू. रेफर कर दिया। जहां याची की हालत काफी गंभीर हो गई। डाक्टरों ने कहा कि बायां पैर काटना पड़ेगा तब याची के घर वालों ने उसी दिन याची को हेरिटेज हास्पिटल लंका में भर्ती किया, 

जहाँ उसका काफी दिन इलाज चला, लेकिन वहां का इलाज काफ़ी महंगा था, जिस वजह से याची को ओमेगा हास्पीटल नेवादा में दिखा गया जहां उसका इलाज आज भी (याचिका योजन की तिथि) चल रहा है, और अब तक दवा इलाज में उसका मु० 15 लाख रुपये खर्च हो चुका है। 

दुर्घटना में आई चोटों के कारण याची स्थायी रूप से अपंग हो गया है चलने फिरने व दैनिक क्रिया करने में काफी कठिनाईयों का सामने करना पड़ता है। जिसके कारण उसकी कार्यक्षमता काफी हद तक प्रभावित हुई है और उसका प्रमोशन प्रभावित हुआ है तथा छुट्टियों की छति हुई है, जिस कारण याची को अत्याधिक मानसिक व शारीरिक पीड़ा उठानी पड़ रही है। 

याची 48 वर्ष का स्वस्थ व्यक्ति और उ०प्र० पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत रहा और अपने विभाग का ईमानदार व कर्मठ कर्मचारी रहा है। याची को वेतन के रूप में 16,000/- प्रतिमाह वेतन मिलता था जिससे वह अपना व अपने परिवार का खर्च चलाता था।

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