जूते पहनकर बाबा साहेब की मूर्ति पर माल्यार्पण

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दरोगा शुभम यादव के वायरल फोटो से भड़का जनाक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग


आलापुर, अम्बेडकरनगर – उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो करोड़ों लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने वाली है। राजेसुल्तानपुर थाने में तैनात दरोगा शुभम यादव पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर जूते पहनकर माल्यार्पण करने का गंभीर आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस घटना की फोटो ने पूरे इलाके में आग लगा दी है, और जनमानस में गुस्सा इस कदर भड़क गया है कि विभिन्न संगठन सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।

अपमान या लापरवाही?
घटना थाना राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के अंतर्गत हुई, जहां दरोगा शुभम यादव ने कथित तौर पर जूते पहने हुए ही बाबा साहेब की प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाई। फोटो में साफ दिख रहा है कि उनके पैरों में जूते हैं, जो किसी भी धार्मिक या सम्मानजनक परंपरा के खिलाफ है। स्थानीय निवासी रामू पासवान ने बताया, “बाबा साहेब संविधान के पिता हैं, दलितों के मसीहा। जूते पहनकर मूर्ति स्पर्श करना अपमान है। यह जानबूझकर किया गया या लापरवाही, लेकिन बर्दाश्त नहीं होगा।”यह फोटो शनिवार रात से ही वायरल हो रही है। पहले तो लोग इसे मजाक समझ रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे शेयर बढ़े, गुस्सा फूट पड़ा। ट्विटर पर #ShoeOnAmbedkarStatue ट्रेंड करने लगा, और फेसबुक ग्रुप्स में सैकड़ों पोस्ट्स ने हंगामा मचा दिया। एक यूजर ने लिखा, “पुलिस वाला होकर कानून का सम्मान नहीं, तो समाज का कैसे?”
जनाक्रोश का आलम: संगठनों ने खड़े किए लाठियां
अंबेडकरनगर में बाबा साहेब के लाखों अनुयायी हैं, और यह घटना उनके लिए व्यक्तिगत अपमान बन गई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थानीय इकाई ने तत्काल विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। संगठन के नेता ने कहा, “यह सवर्णवादी मानसिकता का नंगा नाच है। दरोगा को तुरंत निलंबित करो, वरना आंदोलन होगा।”
आम लोग भी सड़कों पर उतर आए। आलापुर बाजार में दर्जनों युवाओं ने नारेबाजी की – “जूता उतारो, बाबा साहेब का सम्मान करो!” महिलाओं ने भी हिस्सा लिया, कहते हुए कि “ऐसे लोग यूनिफॉर्म के लायक नहीं।” फिलहाल कोई हिंसा नहीं हुई, लेकिन तनाव चरम पर है।
पुलिस महकमे में हड़कंप: क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। एसपी अम्बेडकरनगर ने मामले को संज्ञान में ले लिया है। आधिकारिक बयान में कहा गया, “घटना की जांच चल रही है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।” लेकिन जनता का विश्वास कम है – लोग कह रहे हैं, “अंदरूनी जांच से क्या होगा? एसएसपी स्तर पर निष्पक्ष जांच हो।”
दरोगा शुभम यादव का पिछला रिकॉर्ड सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन यह पहली बार नहीं जब पुलिसकर्मियों पर ऐसी लापरवाही के आरोप लगे। याद रहे, पिछले साल लखनऊ में भी एक समान घटना पर अफसर सस्पेंड हुए थे।
भावनाओं का तकाजा: बाबा साहेब की विरासत
डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमाएं देशभर में आस्था के केंद्र हैं। जूते उतारना हर पूजा-पाठ का नियम है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ी, बल्कि पूरे यूपी में चर्चा तेज हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना चाहिए, वरना मामला राजनीतिक रंग ले सकता है।अंबेडकरनगर के लोग अब प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। क्या दरोगा को सजा मिलेगी, या मामला ठंडा पड़ जाएगा? पूरा क्षेत्र सांस थामे देख रहा है।

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