शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता है : प्रो. दयाशंकर यादव
विश्व शिक्षक दिवस पर सकलडीहा पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा हुई। प्रो. दयाशंकर यादव ने कहा कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद विद्यार्थियों में संस्कार, मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
सकलडीहा, चंदौली। विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सकलडीहा पीजी कॉलेज में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा के महत्व और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक समुदाय के योगदान पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। वहीं प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और सामाजिक चेतना के निर्माण का आधार है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होने के साथ राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करना भी है।
प्राचार्य ने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता प्रदान करने के साथ उन्हें नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना भी आवश्यक है।
मुख्य वक्ता प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में शिक्षा के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक ज्ञान प्राप्त करने के प्रभावी साधन बन रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों में मानवीय संवेदना, संस्कार, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में शिक्षक की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रहेगी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षक समुदाय की भूमिका केंद्रीय है। शिक्षक विद्यार्थियों में विषयगत ज्ञान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समर्पित शिक्षक किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं।
कार्यक्रम में डॉ. राजेश यादव ने शिक्षा के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के साथ सामाजिक परिवर्तन का भी प्रमुख माध्यम है। शिक्षा व्यक्ति को उसके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है तथा समाज को प्रगतिशील दिशा प्रदान करती है।
कार्यक्रम का संचालन बी.एड. विभाग के डॉ. अजय कुमार यादव ने किया। उन्होंने विश्व शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। यह ज्ञान, संस्कार, मार्गदर्शन और व्यक्तित्व निर्माण से जुड़ा संबंध है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. इंद्रजीत सिंह ने सभी अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकगण, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।