कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. जीत सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विधि शिक्षा में अनुशासन, मेहनत और व्यावसायिक नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज को न्याय और उचित दिशा प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के प्रति समर्पित रहने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. ए.के. टंडन ने कहा कि विधि शिक्षा विद्यार्थियों में तार्किक सोच, न्याय की समझ और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन और अनुशासन के साथ अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करने के लिए प्रेरित किया।
कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ. विवेक शर्मा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि कॉलेज में प्रवेश उनके शैक्षणिक सफर के साथ व्यक्तित्व और करियर निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कॉलेज के शैक्षणिक वातावरण का लाभ उठाने, शिक्षकों के मार्गदर्शन का अनुसरण करने और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने की अपील की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार, विभागाध्यक्ष, राजकीय मायावती गर्ल्स पीजी कॉलेज, बादलपुर ने विद्यार्थियों को विधि के बदलते स्वरूप, न्यायपालिका की गरिमा और अधिवक्ताओं के सामाजिक उत्तरदायित्व के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विधि के क्षेत्र में अध्ययन के साथ व्यावहारिक समझ विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस दौरान कॉलेज के लॉ फैकल्टी सदस्यों ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। डॉ. किरण तिवारी ने नियमित अध्ययन, अनुशासन और विषयों की गहराई से समझ विकसित करने को महत्वपूर्ण बताया। आशु गुप्ता ने समय प्रबंधन, सकारात्मक सोच और कक्षा में सक्रिय सहभागिता पर जोर दिया। लिपि शर्मा ने विधि की विभिन्न शाखाओं और उनके व्यावहारिक महत्व की जानकारी दी।
चंचल ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कॉलेज जीवन सीखने और व्यक्तित्व विकास के साथ भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करने को कहा। श. कन्हैया ने विधि के क्षेत्र में करियर की विभिन्न संभावनाओं के बारे में जानकारी दी, जबकि सुश्री दीपिका ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
करमवीर सिंह ने कहा कि विधि का अध्ययन केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को कानून की व्यावहारिक समझ विकसित करने के साथ उसके सामाजिक महत्व को भी समझना चाहिए। कार्यक्रम में कॉलेज के अन्य फैकल्टी सदस्यों ने अपना परिचय देते हुए विद्यार्थियों का स्वागत किया और विधि अध्ययन की विभिन्न शाखाओं तथा अधिवक्ताओं के कर्तव्यों एवं अधिकारों से संबंधित जानकारी साझा की।
पूरा कार्यक्रम संवादात्मक और उत्साहपूर्ण माहौल में आयोजित हुआ। विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने शैक्षणिक लक्ष्यों और भविष्य को लेकर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विधि शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने और न्याय, समानता तथा विधि के शासन के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सुश्री चंचल ने मुख्य अतिथि, कॉलेज प्रशासन, फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और सफल शैक्षणिक जीवन की शुभकामनाओं के साथ हुआ।