जमीन का अधिकार आजीविका से जुड़ा, सरकार पूरा करे-एआईपीएफ

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दलितों-आदिवासियों के आर्थिक सशक्तिकरण पर सरकार कर रही हमला

8 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित होगा राष्ट्रीय सम्मेलन, 

नौगढ़ में हुई एआईपीएफ तहसील ईकाई की बैठक 

चंदौली, नौगढ़, 20 नवंबर 2024 बुधवार। दलितों-आदिवासियों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बजट से दिए जाने वाले सब प्लान में मोदी सरकार लगातार कटौती कर रही है और इस मद के धन को कॉर्पोरेट घरानों को देने का काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त के एससी-एसटी के उप वर्गीकरण के फैसले के बाद आज पूरे देश में दलितों और आदिवासियों को विभाजित करने की राजनीति हो रही है, इसे हर हाल में रोकना होगा। इन तबकों के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर बढ़ाना होगा। इसी सवाल पर दिल्ली में 8 दिसंबर को एआईपीएफ द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें नौगढ़ से भी प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। यह बातें आज नौगढ़ में आयोजित ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की तहसील कमेटी की बैठक में हुई।



बैठक में मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने कहा कि जमीन का सवाल लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। सरकार को जंगल से लेकर ग्राम सभा तक कि जिन जमीनों पर गरीब बसे हुए हैं, उन्हें उनका पट्टा आवंटित करना चाहिए। ताकि वह उसे अपने परिवार की जीविका को चला सके और संविधान में दिए गरिमापूर्ण जीवन को जी सकें।उन्होंने कहा कि नौगढ़ में रोजगार के अभाव में बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए कृषि आधारित उद्योग और गांव की सहकारी समिति के जरिए फलदार वृक्षों पर जोर देना चाहिए। मनरेगा में ₹600 मजदूरी और साल भर काम की गारंटी करनी चाहिए।       

उन्होंने कहा कि एससी-एसटी सब प्लान का पैसा नेशनल हाईवे, सेमी कंडक्टर, टेलीकॉम सेक्टर, कंप्यूटर चिप्स सौर ऊर्जा जैसे उद्योगों और क्षेत्र में लगाया जा रहा है जिसे दलित और आदिवासियों का कोई सीधा संबंध नहीं है। दरअसल यह पैसा कॉरपोरेट घरानों को मुनाफे के लिए दिया जा रहा है जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

बैठक में एआईपीएफ के राज्य कमेटी सदस्य अजय राय, मजदूर किसान मंच के जिला संयोजक रामेश्वर प्रसाद, एआईपीएफ के तहसील प्रभारी रहमुद्दीन, पूर्व प्रधान नंदू राम, राम बली गोंड, विद्यावती गोंड, नंदू, राम बचन, राम नारायण, शम्भू, चैतु प्रसाद, मोहन राम आदि लोगों ने विचार रखे।

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