सिंचाई विभाग की रिपोर्ट से किसान के दावे को मिला बल, पुरानी स्थिति बहाल कराने की मांग तेज

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2021 की संयुक्त जांच और 2023 के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप, एसडीएम सदर व किसान दिवसाधिकारी से फिर लगाई न्याय की गुहार
चंदौली। सदर तहसील क्षेत्र के सिरकलपुर गांव में नहर की कथित गलत पैमाइश का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। गांव निवासी किसान रामजी पुत्र बिरजू ने तहसील दिवस पर उपजिलाधिकारी सदर व किसान दिवसाधिकारी चंदौली को प्रार्थना पत्र देकर सिंचाई विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट और पूर्व में पारित आदेश का हवाला देते हुए अपनी कृषि भूमि की पुरानी स्थिति बहाल कराने की मांग की है।

किसान का कहना है कि उसकी आराजी संख्या-88 की भूमि के पूर्वी हिस्से में नहर की पैमाइश गलत तरीके से कर दी गई, जबकि मौके पर पश्चिम दिशा में पहले से चकमार्ग मौजूद है और नहर की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों से अलग है। इससे उसकी खेती योग्य भूमि प्रभावित हो रही है और लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मामले की जांच वर्ष 2021 में सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने की थी। जांच के दौरान राजस्व अभिलेख, पुराने नक्शे, चेन सर्वे, ग्रामीणों के बयान तथा मौके की स्थिति का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि वर्तमान में दिखाई जा रही नहर की स्थिति अभिलेखों से मेल नहीं खाती तथा पूर्व में की गई पैमाइश में त्रुटियां पाई गई हैं। रिपोर्ट में नहर की पुरानी स्थिति बहाल करते हुए अभिलेखों के अनुरूप कार्रवाई करने की संस्तुति भी की गई थी।
इसके बाद 9 जून 2023 को सक्षम अधिकारी द्वारा संबंधित आदेश भी पारित किया गया। किसान का आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद आज तक न तो गलत पैमाइश हटाई गई और न ही नहर को उसके वास्तविक स्थान पर स्थापित किया गया।
इसी आधार पर किसान ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि सिंचाई विभाग की जांच रिपोर्ट और पूर्व आदेश को अमल में लाते हुए भूमि की दोबारा सही पैमाइश कराई जाए तथा नहर की वास्तविक स्थिति बहाल कर उसे न्याय दिलाया जाए।
किसान का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी खेती और आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। अब यह मामला प्रशासन के सामने है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों पुराने विवाद पर आखिर कब तक प्रभावी कार्रवाई होती है।

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