बिना मानक के चल रहें प्राइवेट अस्पताल व पैथोलॉजी लैब:अजय राय

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सरकारी डाक्टर मरीजों को बाहर की दबाएं और जांच लिखते हैं जिनमें उन्हें निश्चित कमीशन राशि मिलती है 

पैथोलॉजी लैब में पैथोलॉजिस्ट का नाम तो नियुक्त होता है लेकिन जांच कोई और करता हैं

चंदौली। स्वास्थ्य विभाग में सरकारी सुविधा की कमी से स्वास्थ्य केंद्र व जिला संयुक्त चिकित्सालय में मरीजों का समूचित इलाज नहीं हो पा रहा हैं ! नतीजतन मरीजों को लेकर परिजन को प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता हैं वहीं विभिन्न जांच के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी लैब व डाइग्नोसटिक केन्द्र का सहारा लेना पड़ता हैं।



प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व अन्य सरकारी अस्पताल केवल मरीजों को रेफर करने वाले अस्पताल के रूप में काम करते हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के लापरवाही से मौत व दुर्व्यवहार की खबर लगातार आती हैं। परिजनों का सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त आरोप लगता भी हैं। अधिकारियों द्वारा जांच करने का आश्वासन भी मिलता हैं लेकिन कार्यवाही कुछ नहीं होती हैं।



सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर डाक्टर की कमी से लेकर अन्य स्टाफ की कमी ज्यादा हैं। कोबिड 19 के समय रखे स्टाफ को भी हटा लिया गया। उनका समायोजन नहीं हो रहा हैं सरकारी स्वास्थ्य विभाग में नई भर्ती भी नहीं हो रहीं हैं। चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय में खरीद कर आई अल्ट्रासाउंड मशीन अनुभवी स्टाफ के कारण खराब हो रहीं हैं।

 नतीजतन बाहर से मरीजों को ज्यादा पैसा देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता हैं ! सरकारी दवा भी मरीजों के रोग के अनुसार सरकारी अस्पताल में नहीं मिलती है। नतीजतन परिजनों को बाहर से खरीदना पड़ता हैं। जिसमें चर्चा हैं कि डाक्टर को निश्चित कमीशन भी मिलता हैं। बाहर के जांच लिखने पर भी यह राशि मिलती हैं।

आईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने जब चंदौली जनपद में स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्साधिकारी से प्राइवेट अस्पताल , जांच केन्द्र , डाइग्नोसटिक केन्द्र व क्लिनिक ,की संख्या , डाक्टर जो जांच करते हैं ,उनकी डिग्री और पंजीकरण नंबर की जानकारी जन सूचना मांगी तो मिला कि जनपद चंदौली में कुल 163 अस्पताल व 60 जांच केन्द्र अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में पंजीकृत हैं और पैथोलॉजी लैब में कौन-कौन से एमडी पैथोलॉजिस्ट जांच करते हैं इसकी जानकारी दिया गया।

 लेकिन जनपद में सैकड़ों प्राइवेट अस्पताल व पैथोलॉजी लैब मौजूद हैं जो लगभग रोजाना मरीजों का इलाज व विभिन्न रोगों के नाम पर परिजनों का आर्थिक व मानसिक शोषण करतें हैं। पैथोलॉजिस्ट का नाम तो पैथोलॉजी लैब में नियुक्त हैं लेकिन लगभग सभी पैथोलॉजी लैब में जांच कोई और करता हैं।

 लगभग सभी पैथोलॉजी लैब में जांच करने में जो पैसा लगता है वह भी बोर्ड पर नहीं लिखा रहता हैं। नतीजा मरीजों से अधिक पैसा लिया जाता हैं। स्वास्थ्य विभाग भी प्राईवेट अस्पताल जो बिना मानक व पंजीकरण के चल रहें हैं उनपर कोई कार्रवाई नहीं करता हैं और कभी-कभी कार्यवाई करता भी हैं तो कोरम पूर्ति हेतु।

श्री राय ने चकिया के कई पैथोलॉजी लैब , प्राइवेट अस्पताल में जाकर जानकारी प्राप्त किया और पाया कि दर्जनों पैथोलॉजी लैब , डाइग्नोसटिक केन्द्र , प्राइवेट अस्पताल मानक के विपरित और बिना स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण के चल रहे हैं और कुछ पंजीकरण भी कराए हैं तो मानकों का पालन नहीं करते हैं और पैथोलॉजी लैब पर जो पैथोलॉजिस्ट जांच करने का जिक्र हैं वह तो लगभग आतें हीं नहीं हैं।

उन्होंने चकिया स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर विकास सिन्हा से मिलकर मानक के विपरित व विना पंजीकरण के और पैथोलॉजिस्ट के पैथोलॉजी लैब को बंद कराने , डाइग्नोसटिक केन्द्र पर रोक लगाने ,और मानकों के विपरित और स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण के खुले प्राइवेट अस्पताल पर रोक लगाने तथा अभी-अभी उपजिलाधिकारी चकिया व आपके द्वारा बंद कराए एक पैथोलॉजी लैब जो चोरी छीपे जांच कर रहा हैं उस पर मुकदमा करने की मांग किया है।

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