वामपंथी दलों ने डॉ. अंबेडकर के अपमान के खिलाफ किया प्रदर्शन

अमित शाह के इस्तीफे व मोदी सरकार से माफी मांगने की मांग की, राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा
लखनऊ, 30 दिसंबर। भाकपा (माले) समेत वामपंथी दलों ने गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद (राज्य सभा) में बाबा साहब अंबेडकर का अपमान करने के खिलाफ सोमवार को देशव्यापी विरोध दिवस मनाया. राष्ट्रपति को ज्ञापन भेज कर शाह के इस्तीफे और मोदी सरकार से देश से माफी मांगने की मांग की.
वाम दलों भाकपा (माले), माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लॉक और आरएसपी के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली में हाल में बैठक कर डॉ. अंबेडकर के अपमान को गंभीरता से लिया था और देशव्यापी विरोध का संयुक्त आह्वान किया था.
लखनऊ के ग्राम इंदाराबाग में मार्च निकाल कर अमित शाह के इस्तीफे की मांग की गई. भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने मार्च व प्रदर्शन का नेतृत्व किया.
गोरखपुर में भाकपा (माले), माकपा व भाकपा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा.
आजमगढ़ में वाम दलों ने शहीद कुंवर सिंह उद्यान से जिलाधिकारी कार्यालय तक संयुक्त मार्च निकाला. राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिया.
इसके अलावा, मिर्जापुर, गाजीपुर, चंदौली, मऊ, अयोध्या, रायबरेली, गोंडा, जालौन, वाराणासी, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, मथुरा आदि जिलों में भी प्रदर्शन हुए.
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि अमित शाह ने संसद में अंबेडकर का अपमान करते हुए लोगों द्वारा बार-बार संविधान का नाम लिये जाने पर भाजपा की गहरी बेचैनी व्यक्त की. इस प्रक्रिया में उन्होंने संघ की मनुवादी मानसिकता और एजेंडे को भी उजागर किया. जबकि अंबेडकर ने अपने पूरे जीवन में लोगों को जाति और लैंगिक उत्पीड़न की बेड़ियों में जकड़े रखने के लिए धर्म के शोषणकारी उपयोग के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उत्पीड़ितों के लिए न्याय, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा सुनिश्चित करना अंबेडकर की एकमात्र चिंता थी.
नेताओं ने कहा कि अमित शाह ने उन लोगों का, जो अंबेडकर का नाम लेते हैं, मजाक उड़ाया. अंबेडकर का नाम लेने वाले सबसे पहले उत्पीड़ित और वंचित बहुजन समुदायों के लोग हैं, जिन्हें अपने अस्तित्व और सम्मान के लिए हर दिन और हर जगह लड़ना पड़ता है. उन्हें संविधान में दिए अधिकारों के संघर्ष और दावे के बिना कुछ भी नहीं मिलता है.
वक्ताओं ने आगे कहा कि अमित शाह का विरोध बढ़ने पर भाजपा अब अंबेडकर को नेहरू के खिलाफ खड़ा करने और नेहरू कैबिनेट से अंबेडकर के इस्तीफे के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने का शरारती प्रयास चला रही है. भाजपा के इस सफेद झूठ का भी पर्दाफाश करना होगा.