आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सकलडीहा में लेखपालों का धरना जारी, अतिरिक्त हल्कों का काम ठप

सकलडीहा तहसील में आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपालों का आंदोलन जारी है। 40 लेखपाल अतिरिक्त हल्कों का कार्य बहिष्कार कर चुके हैं, जिससे आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, वरासत और पैमाइश समेत कई राजस्व कार्य प्रभावित हैं।

सकलडीहा, चंदौली। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर लंबित मांगों के समाधान को लेकर सकलडीहा तहसील में लेखपालों का आंदोलन जारी है। लेखपाल अतिरिक्त हल्कों का कार्य करने से इनकार करते हुए संबंधित अभिलेख और बस्ते राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा कर चुके हैं। इससे अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, वरासत, पैमाइश और अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सकलडीहा तहसील में 40 लेखपालों के कार्य बहिष्कार की जानकारी सामने आई है।

लेखपाल संघ का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगें लंबित हैं। प्रदेश संगठन के निर्देश पर पहले अतिरिक्त हल्कों का प्रभार छोड़ने और अब लगातार धरना-प्रदर्शन के माध्यम से शासन का ध्यान मांगों की ओर आकर्षित किया जा रहा है। लेखपालों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

अतिरिक्त हल्कों का बस्ता जमा

आंदोलन के तहत लेखपालों ने अपने मूल हल्के के अतिरिक्त जिन गांवों का प्रभार संभाल रखा था, उनसे संबंधित बस्ते और अभिलेख वापस जमा कर दिए हैं। सकलडीहा तहसील में यह प्रक्रिया 22 सितंबर से शुरू हुई थी। इससे अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों में राजस्व विभाग से जुड़े कई कार्यों की गति प्रभावित हुई है।

लेखपालों का तर्क है कि एक ही कर्मचारी पर मूल हल्के के साथ अतिरिक्त क्षेत्रों का काम होने से कार्यभार बढ़ रहा है। संगठन इसी व्यवस्था में बदलाव और अपनी लंबित मांगों के समाधान की मांग कर रहा है।

आठ सूत्रीय मांगों पर जोर

लेखपाल संघ की प्रमुख मांगों में अंतर-मंडलीय तथा गृह जिले या मंडल में स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करना, 2800 ग्रेड पे के आधार पर वेतन विसंगति दूर करना और वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करना शामिल है। इसके अलावा वर्ष 2024 में नियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा का परिणाम एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र घोषित करने की मांग भी उठाई गई है।

संघ की ओर से लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने तथा साइकिल और स्टेशनरी समेत विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी की मांग भी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर लेखपाल संगठन पहले भी इन मांगों को लेकर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख चुका है।

राजस्व सेवाओं पर असर

अतिरिक्त हल्कों का कार्य बहिष्कार होने से ग्रामीणों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन के साथ ही वरासत, भूमि पैमाइश और अन्य राजस्व कार्यों में देरी की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह अतिरिक्त हल्कों के बस्ते जमा किए जाने के बाद राजस्व सेवाओं पर असर पड़ने की रिपोर्ट सामने आई है।

सकलडीहा में लेखपालों का कहना है कि उनका आंदोलन लंबित मांगों के समाधान के लिए संगठनात्मक निर्णय के तहत चल रहा है। लेखपालों ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक अतिरिक्त हल्कों का कार्य नहीं संभालने का रुख कायम रखा है।

प्रदेश स्तर पर लेखपाल संघ की ओर से भी शासन से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की जा रही है। संगठन का कहना है कि यदि समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को आगे और विस्तार दिया जा सकता है।