धानापुर के हिनौता में कनौजिया परिवार ने मृत्यु भोज का बहिष्कार किया, गूंजा—जीना है अगर शान से तो पंचशील का झंडा गाड़ दो
धानापुर के हिनौता गांव में परिनीबुत शारदा देवी की तेरहवीं बौद्ध रीति से संपन्न हुई। कनौजिया परिवार ने पारंपरिक मृत्यु भोज का बहिष्कार किया। कार्यक्रम में बुद्ध, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संत गाडगे के विचारों पर चर्चा करते हुए पाखंड व आडंबर से दूर रहने तथा तर्क, विवेक, समानता और मानवतावादी मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया। इस दौरान “जीना है अगर शान से तो पंचशील का झंडा गाड़ दो” का संदेश प्रमुखता से गूंजा।
चंदौली। धानापुर क्षेत्र के हिनौता गांव में परिणिबुत शारदा देवी पत्नी शंकर प्रसाद कनौजिया की तेरहवीं बौद्ध रीति-रिवाज से संपन्न हुई। 90 वर्षीय शारदा देवी का 23 सितंबर 2026 को परिनिर्वाण हुआ था। उनके पीछे दो पुत्र, तीन पुत्रियां और नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार है। कनौजिया परिवार ने तेरहवीं के अवसर पर पारंपरिक मृत्यु भोज का बहिष्कार करते हुए सादगी के साथ बौद्ध पद्धति से कार्यक्रम आयोजित किया। बोधिशरण बौद्ध के त्रिशरण पाठ के बीच वक्ताओं ने पाखंड, आडंबर और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने तथा तथागत गौतम बुद्ध, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संत गाडगे के मानवतावादी विचारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में “जीना है अगर शान से तो पंचशील का झंडा गाड़ दो” का संदेश प्रमुखता से गूंजा।

तर्क और विवेक के साथ जीवन जीने का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी परंपरा को केवल इसलिए नहीं अपनाया जाना चाहिए कि वह लंबे समय से चली आ रही है। समाज को हर परंपरा को तर्क, विवेक और मानव कल्याण की कसौटी पर परखना चाहिए। अनावश्यक खर्च, दिखावे और सामाजिक दबाव से लोगों को मुक्त होकर सादगी तथा मानवीय मूल्यों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
शशिकांत कनौजिया, प्रधानाध्यापक, श्याम कार्तिक कनौजिया, प्रधानाध्यापक, गोपाल कनौजिया, तेरसू राम कनौजिया, राजस्व निरीक्षक, लक्ष्मीकांत, गोविंद प्रसाद और सुशील कुमार समेत अन्य वक्ताओं ने तथागत गौतम बुद्ध, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संत गाडगे के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध ने अंधानुकरण के बजाय तर्क, विवेक, करुणा, समानता और मानव कल्याण को महत्व दिया। उनके विचार व्यक्ति को स्वयं विचार करने और सत्य को समझने की प्रेरणा देते हैं।
पंचशील को जीवन में उतारने पर जोर
कार्यक्रम में पंचशील के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पंचशील व्यक्ति को बेहतर आचरण और सामाजिक जीवन की दिशा प्रदान करता है। हिंसा, चोरी, दुराचार, असत्य और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक अनुशासित और समाजोपयोगी बना सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने के लिए समाज को दिखावे और रूढ़ियों से बाहर निकलकर विवेकपूर्ण जीवन पद्धति अपनानी होगी। इसी संदेश को “जीना है अगर शान से तो पंचशील का झंडा गाड़ दो” के उद्घोष के माध्यम से सामने रखा गया।
अर्जुन प्रसाद आर्य बोले—स्वयं पर विश्वास रखने वाला ही बोधि हुआ
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अर्जुन प्रसाद आर्य ने कहा कि “स्वयं पर विश्वास रखने वाला ही बोधि हुआ।” उन्होंने कहा कि तथागत बुद्ध ने मन और चित्त को साधने तथा उसे शांत रखने का मार्ग दिखाया। बुद्ध ने समाज को तर्क के आधार पर विचार करने और जीवन में विवेक को महत्व देने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन में विचार और आचरण का विशेष महत्व है। व्यक्ति जब स्वयं के भीतर परिवर्तन लाता है, तभी सामाजिक परिवर्तन की दिशा मजबूत होती है।
मृत्यु भोज का बहिष्कार बना चर्चा का केंद्र
कनौजिया परिवार द्वारा मृत्यु भोज का बहिष्कार कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा। परिवार ने पारंपरिक मृत्यु भोज के स्थान पर बौद्ध रीति से तेरहवीं संपन्न कराई। वक्ताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद परिवार पर अनावश्यक आर्थिक और सामाजिक दबाव डालने के बजाय सादगी के साथ श्रद्धांजलि देना अधिक सार्थक है।
कार्यक्रम में कहा गया कि सामाजिक बदलाव केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर उठाए गए कदमों से भी आता है। यदि लोग स्वयं अनावश्यक खर्च और रूढ़ियों से दूरी बनाना शुरू करें तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
बुद्ध और अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने का आह्वान
वक्ताओं ने कहा कि तथागत बुद्ध ने करुणा, मैत्री, समानता और विवेक का मार्ग दिखाया, जबकि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। संत गाडगे ने भी समाज में स्वच्छता, शिक्षा और कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम में इन विचारों को वर्तमान सामाजिक जीवन में अपनाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज को अंधविश्वास, पाखंड और आडंबर के बजाय शिक्षा, तर्क, विवेक और मानवतावादी मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
श्रीराम कनौजिया के देखरेख में हुआ आयोजन
तेरहवीं एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक श्रीराम कनौजिया की देखरेख में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्जुन प्रसाद आर्य ने की, जबकि संचालन रविकांत योगाचार्य ने किया। बोधिशरण बौद्ध ने त्रिशरण पाठ कराया।
कार्यक्रम में शारदा देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों और उपस्थित लोगों ने सादगी, समानता, शिक्षा, विवेक तथा मानवतावादी विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। मृत्यु भोज का बहिष्कार कर कनौजिया परिवार ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपने स्तर पर एक संदेश देने का प्रयास किया।