डीडीयू मंडल में संरक्षा का मजबूत रिकॉर्ड, छह माह में न ट्रेन पटरी से उतरी, न सिग्नल पार हुआ
डीडीयू मंडल में अप्रैल से सितंबर 2026 तक कोई परिणामी रेल दुर्घटना, ट्रेन के पटरी से उतरने, सिग्नल पार करने या समपार दुर्घटना का मामला दर्ज नहीं हुआ। इस दौरान 250 से अधिक निरीक्षण और 13 विशेष संरक्षा अभियान चलाए गए।
चंदौली। पूर्व मध्य रेल के अति व्यस्त पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में रेल संरक्षा के मोर्चे पर बेहतर स्थिति सामने आई है। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान मंडल में कोई परिणामी रेल दुर्घटना, मुख्य लाइन या यार्ड में ट्रेन के पटरी से उतरने, सिग्नल पार करने या समपार फाटक पर दुर्घटना का मामला दर्ज नहीं हुआ। इसी अवधि में संरक्षा को प्रभावित करने वाली उपकरण विफलताओं के मामले भी शून्य रहे। मंडल में संभावित खामियों की समय रहते पहचान, 250 से अधिक गहन एवं औचक निरीक्षण, 13 विशेष संरक्षा अभियान और कर्मचारियों की सतर्कता को इसका अहम आधार बताया गया है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल देश के प्रमुख रेल मार्गों में शामिल है। इसके महत्वपूर्ण रेलखंडों में पंडित दीन दयाल उपाध्याय-मानपुर ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन, सोन नगर-गढ़वा रोड और सासाराम-आरा रेलखंड शामिल हैं। इन मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों का लगातार आवागमन होता है। साथ ही मंडल का ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ भी इंटरफेस है। ऐसे में रेल परिचालन की सुरक्षा को लेकर मंडल स्तर पर लगातार निगरानी और जांच की जाती है।
संभावित खतरे की समय रहते पहचान
मंडल में संरक्षा को लेकर केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई के बजाय संभावित जोखिमों की पहले पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है। पिछले दो वित्त वर्षों में 120 ऐसे मामलों की पहचान की गई, जिनमें समय रहते संरक्षा संबंधी आवश्यकता सामने आई। इनमें वर्ष 2024-25 में 63 और वर्ष 2025-26 में 57 मामले शामिल हैं। आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के जरिए संभावित दुर्घटना जोखिम को गंभीर स्थिति बनने से पहले नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
250 से अधिक गहन और औचक निरीक्षण
संरक्षा विभाग की ओर से परिचालन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नियमित और औचक जांच की जा रही है। अब तक 250 से अधिक गहन एवं औचक निरीक्षण किए जा चुके हैं। इनमें स्टेशन और केबिन, समपार फाटक, फुटप्लेट निरीक्षण, एम्बुश तथा रात्रिकालीन जांच शामिल हैं।

रात्रिकालीन जांच के दौरान रेल कर्मचारियों की ब्रेथ एनालाइजर से भी जांच की गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों को शामिल करते हुए 5 क्रॉस-फंक्शनल संरक्षा ऑडिट भी किए गए, ताकि अलग-अलग विभागों से जुड़े संभावित जोखिमों की संयुक्त रूप से समीक्षा की जा सके।
13 विशेष संरक्षा अभियान चलाए गए
चालू वित्त वर्ष में मंडल में 13 विशेष संरक्षा अभियान भी चलाए गए। इनमें अग्नि सुरक्षा, मानसून के दौरान सावधानियां, शंटिंग सुरक्षा, वातानुकूलित कोचों की जांच तथा पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग की जांच जैसे विषय शामिल रहे। इन अभियानों के माध्यम से परिचालन के दौरान सामने आने वाली तकनीकी और व्यवहारिक कमियों की पहचान कर सुधार पर जोर दिया गया।
सतर्क रेलकर्मियों को मासिक संरक्षा पुरस्कार
रेल परिचालन को दुर्घटना मुक्त रखने में फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका अहम मानी जाती है। इसी सजगता को प्रोत्साहित करने के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 में विभिन्न विभागों के 19 रेलकर्मियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मासिक संरक्षा पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।

मंडल स्तर पर कर्मचारियों के प्रशिक्षण, काउंसलिंग और निर्धारित नियमों के पालन पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है, ताकि संरक्षा व्यवस्था केवल तकनीकी प्रणालियों तक सीमित न रहे।
सभी 102 समपार फाटक मानवयुक्त
रेल और सड़क यातायात की सुरक्षा के लिए मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी 102 समपार फाटक मानवयुक्त हैं। इनमें 46 इंटरलॉक्ड और 56 नॉन-इंटरलॉक्ड समपार फाटक शामिल हैं।
समपार फाटकों पर नियमों के पालन के साथ सड़क उपयोगकर्ताओं को भी जागरूक किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय समपार जागरूकता दिवस के अवसर पर मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पर्चे बांटने और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को रेल लाइन पार करते समय सावधानी बरतने तथा रेल सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया गया।
आपात स्थिति से निपटने की भी तैयारी
आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य की तैयारियों को परखने के लिए वर्ष 2025 में मंडल में एनडीआरएफ के साथ संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। गया में एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन, पटना तथा डीडीयू में 11वीं बटालियन, वाराणसी के साथ हुए इन अभ्यासों में आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, राहत-बचाव कार्य और उपलब्ध संसाधनों की तैयारियों को परखा गया।
तकनीकी प्रणालियों से भी मजबूत हुई निगरानी
मंडल के सभी स्टेशनों पर ट्रेन संचालन, सिग्नल और विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था में मदद करने वाली तकनीकी प्रणालियां चालू हैं। इनमें बीपीएसी, आरआरआई/ईआई, एलईडी सिग्नल और आईपीएस जैसी प्रणालियां शामिल हैं।

मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के मार्गदर्शन में संरक्षा विभाग अन्य विभागों के साथ समन्वय कर इन व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का जोर संभावित खामियों को समय रहते चिन्हित कर उन्हें दूर करने पर है।
रेल मंडल प्रशासन का कहना है कि संरक्षा कोई एक बार पूरा होने वाला कार्य नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। व्यस्त रेल नेटवर्क में बदलती परिस्थितियों, तकनीकी आवश्यकताओं और परिचालन चुनौतियों को देखते हुए निरीक्षण, जोखिम की पहचान, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।