धानापुर में इंद्रा हॉस्पिटल फिर सील, संचालक गिरफ्तार, महिला की मौत के बाद जागा महकमा
धानापुर का इंद्रा हॉस्पिटल महिला की मौत के बाद फिर सील कर दिया गया। अस्पताल 12 मार्च 2025 को भी सील हुआ था, लेकिन बाद में दोबारा संचालित होने लगा। अब सवाल उठ रहा है कि पूर्व कार्रवाई के बावजूद अस्पताल कैसे चलता रहा और क्षेत्र में संचालित अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी कितनी प्रभावी है।
चंदौली। धानापुर कस्बे में महिला की ऑपरेशन के दौरान मौत के मामले में विवादों में आए इंद्रा हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को फिर सील कर दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. परितोष मिश्रा के निर्देश पर सीएचसी धानापुर के अधीक्षक डॉ. रितेश कुमार की निगरानी में हुई कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। अस्पताल संचालक 24 वर्षीय इंद्रजीत प्रजापति को पुलिस 3 अक्टूबर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। खास बात यह है कि अस्पताल को 12 मार्च 2025 को भी सील किया गया था, लेकिन बाद में उसके दोबारा संचालित होने की बात सामने आई। अब महिला की मौत और संचालक की गिरफ्तारी के बाद हुई कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महिला की मौत के बाद सामने आया मामला
लखईपुर गांव निवासी सुमन को 18 अगस्त को इंद्रा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन उसका ऑपरेशन किया गया। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान गलत रक्त वाहिका कटने और किडनी को नुकसान पहुंचने के बाद महिला की हालत बिगड़ गई और उसी रात उसकी मौत हो गई। मृतका के पिता चंद्रबली बिंद की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल संचालक के पास डॉक्टर के रूप में मरीजों का इलाज और सर्जरी करने की वैध चिकित्सकीय योग्यता नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, जिस दिन सर्जन अस्पताल नहीं पहुंचा, उस दिन संचालक ने ही महिला का ऑपरेशन कर दिया। इसी मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा।
12 मार्च 2025 को सीलिंग के बाद फिर कैसे खुला अस्पताल?
इंद्रा हॉस्पिटल को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल 12 मार्च 2025 की कार्रवाई को लेकर है। यदि उस समय अस्पताल को सील किया गया था तो आखिर बाद में वह दोबारा कैसे संचालित होने लगा? सीलिंग के बाद अस्पताल की निगरानी किस स्तर पर हुई? दोबारा संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली? और यदि कोई अनुमति नहीं थी तो संबंधित विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही सामने आ सकता है।
गांव-गांव झोलाछाप, चट्टी-चौराहों पर क्लीनिकों की भरमार
इंद्रा हॉस्पिटल की कार्रवाई ने धानापुर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी तस्वीर पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। गांव-गांव झोलाछाप डॉक्टरों के जरिए इलाज, बाजारों और चट्टी-चौराहों पर खुले क्लीनिक, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी सेंटर और मेडिकल स्टोर लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं।
सवाल यह है कि जिन संस्थानों और व्यक्तियों के पास आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता, पंजीकरण अथवा निर्धारित मानक नहीं हैं, वे इतने लंबे समय तक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां कैसे संचालित करते रहते हैं?
अगर स्वास्थ्य विभाग की नियमित जांच व्यवस्था प्रभावी है तो ऐसे संस्थान लगातार नजर में क्यों नहीं आते? और यदि कार्रवाई होती भी है तो उसके बाद दोबारा संचालन पर निगरानी कौन करता है?
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था अस्पताल?
इंद्रा हॉस्पिटल का मामला अब केवल एक अस्पताल को सील करने तक सीमित नहीं रह गया है। आखिरकार 12 मार्च 2025 को सील किए जाने के बाद यह अस्पताल इतने दिनों तक किसकी निगरानी में चलता रहा? क्या विभाग को इसके दोबारा संचालन की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इसी तरह क्षेत्र में संचालित अन्य निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी सेंटरों और मेडिकल स्टोरों की भी जांच की मांग उठने लगी है।
क्या स्वास्थ्य विभाग धानापुर क्षेत्र में संचालित ऐसे सभी संस्थानों की सूची तैयार कर उनके पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और संचालन की वैधता की जांच करेगा? यह सवाल अब इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक अस्पताल में कथित अनधिकृत ऑपरेशन के बाद महिला की जान चली गई और इसके बाद विभाग को अस्पताल सील करने की कार्रवाई करनी पड़ी।
कार्रवाई के साथ निगरानी भी जरूरी
इंद्रा हॉस्पिटल को दोबारा सील किए जाने के बाद अब लोगों की निगाह स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर है। केवल अस्पताल सील करने से सवाल खत्म नहीं होंगे। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि पूर्व की कार्रवाई के बावजूद अस्पताल दोबारा कैसे संचालित हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
साथ ही धानापुर क्षेत्र में संचालित अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भी व्यापक जांच होती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई और भविष्य में दोबारा संचालन रोकने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
फिलहाल इंद्रा हॉस्पिटल सील है, संचालक जेल में है और महिला की मौत के मामले में पुलिस की कानूनी कार्रवाई जारी है। लेकिन इसके साथ उठे ‘पहले सील होने के बावजूद अस्पताल दोबारा कैसे चला?’ और ‘क्षेत्र में ऐसे अन्य संस्थान किसकी निगरानी में संचालित हो रहे हैं?’ जैसे सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और जांच से मिलना बाकी है।