योगी सरकार के इस आदेश का पार्टी करेगी राज्यव्यापी विरोध : माले

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तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की

लखनऊ, 19 जुलाई। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा वाले रास्तों पर पड़ने वाली खाने-पीने की दुकानों पर उनके मालिकों का नाम लिखने को अनिवार्य वाले मुख्यमंत्री योगी के आदेश का भाकपा (माले) ने कड़ी आलोचना की है।अभी तक ऐसा आदेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, शामली व सहारनपुर में कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले ढाबों-होटलों के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से जारी किया गया था।



पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह का सरकारी आदेश सांप्रदायिक सद्भाव को क्षति पहुंचाने वाला, विभाजनकारी, अस्पृश्यता मूलक और संविधान-विरोधी है। उन्होंने इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।

माले नेता ने कहा कि कांवड़ यात्रा की आड़ में भाजपा सरकार ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। आदेश का मकसद अल्पसंख्यक समाज को निशाना बनाना है। नफरत फैलाकर समाज को बांटने की कोशिश को प्रदेशवासियों ने लोकसभा चुनाव में करारा जवाब दिया। लगता है भाजपा ने कोई सबक नहीं सीखा।

कामरेड सुधाकर ने कहा कि जनदबाव में मुजफ्फरनगर पुलिस आदेश को लेकर बैकफुट पर गई थी और गुरुवार को नया नोटिस जारी कर स्वेच्छा से पालन करने को कहा था। मगर 24 घंटे के भीतर ही नए फरमान के साथ खुद मुख्यमंत्री के सामने आने से स्पष्ट हो गया कि मामला सिर्फ मुजफ्फरनगर या दो-तीन जिलों के प्रशासन का नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश सरकार की नीति है। 

राज्य सचिव ने कहा इस आदेश का राज्यव्यापी विरोध किया जाएगा और हर हाल में गंगा जमुनी तहजीब, धर्मनिरपेक्षता व लोकतंत्र की रक्षा की जाएगी। पार्टी इकाइयों से आदेश की प्रतियां जलाकर जिलों में प्रतिवाद के लिए कहा गया है। उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द में भरोसा करने वाली शक्तियों से आगे आकर नफरती फरमान का विरोध करने की अपील की।

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