नेपाल के बीरगंज में मुस्लिम इज्तिमा: बॉर्डर पर हाई अलर्ट, भारत ने कसी नकेल

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नेपाल के बीरगंज में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा धार्मिक आयोजन जोर-शोर से चल रहा है, जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों से सैकड़ों मौलाना व धर्मगुरु पहुंचे हैं। इस ‘महा जुटान’ को देखते हुए भारत की इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट पर रक्सौल बॉर्डर पर सुरक्षा की कमान सख्ती से थाम ली गई है। एसएसबी के जवान हर आने-जाने वाले की कड़ी जांच कर रहे हैं, ताकि कोई संदिग्ध चपेट में न आए।

रक्सौल थाने के ट्रेनी एसपी हेमंत सिंह और एसडीपीओ मनीष आनंद खुद मैत्री पुल पर डटे हुए हैं। वे हर वाहन की सघन तलाशी ले रहे हैं—चाहे पैदल यात्री हों या भारी ट्रक। हेमंत सिंह ने बताया, “बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त कर दिया गया है। नेपाल के इस आयोजन की सूचना पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।”
2023 का काला अध्याय: इज्तिमा पर नेपाल की सर्जिकल स्ट्राइक
यह पहली बार नहीं जब नेपाल में मुस्लिम इज्तिमा ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी हो। 2023 में सुनसरी जिले के दुहाबी-इटहरी में होने वाला ऐसा ही विशाल जमावड़ा नेपाल सरकार ने रद्द कर दिया था। कारण? भारत समेत कई देशों में बैन कट्टरपंथी मौलाना इसकी शिरकत करने वाले थे।
भव्यता का पैमाना: 80 एकड़ जमीन पर टेंट, 50 हजार लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था—यह कोई छोटा मेला नहीं था। गृह मंत्रालय ने धार्मिक संवेदनशीलता का हवाला देकर 24 घंटे में सब साफ करने का फरमान सुनाया। आने वाले तीर्थयात्री भी वापस लौटे।
जिला प्रशासन की भूमिका: तत्कालीन जिलाधिकारी ने मंत्रालय को खत लिखकर जोखिम बताए—धार्मिक तनाव, बॉर्डर पर अशांति की आशंका। मंत्रालय ने तुरंत रद्दी स्टांप ठोका। ऐसे आयोजनों से न सिर्फ नेपाल, बल्कि पड़ोसी भारत की सीमा पर भी भावनाएं भड़कने का खतरा रहता है। वर्तमान बीरगंज इज्तिमा पर भी नजरें तरेर हैं, क्योंकि इतिहास खुद को दोहरा सकता है। क्या यह शांतिपूर्ण रहेगा, या फिर अलर्ट लेवल ऊंचा होगा?

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