चंदौली में मौत का जाल गायब फुटपाथ

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पैदल यात्री ट्रैफिक के शिकार, जिम्मेदारों की चुप्पी से छात्र-बच्चों पर खतरा, किसान नेता पिंटू पाल सड़कों पर उतरने को तैयार

चंदौली की सड़कों पर पैदल यात्रियों की जिंदगी दांव पर लटकी हुई है। फुटपाथों की भारी कमी, खराब यातायात व्यवस्था और तेज रफ्तार वाहनों ने गांव और शहर को ‘मौत का जाल’ बना दिया है। खासकर सकलडीहा और जनपद के अन्य मुख्य मार्गों पर छात्र-छात्राएं, बच्चे व बाइक-साइकिल सवार सीधे ट्रैफिक के बीच फंसकर लापरवाह चालकों के निशाने पर हैं। हर दूसरे दिन हादसे, चोटें और मौतें—फिर भी जिम्मेदार अधिकारी खामोश हैं।

जमीनी सच्चाई: खतरे की घंटी बज रही है। जीटी रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर फुटपाथ न होने से छात्रों को सड़क पार करना जोखिम भरा साबित हो रहा। बाइकर्स को खेतों में उतरना पड़ता है, जाम से परेशान लोग टक्करों के शिकार हो रहे। हाल के आंकड़े चौंकाने वाले—लगातार दुर्घटनाओं में गैर-जिम्मेदार चालकियां मौत का कारण बन रही हैं।
सरकार के सख्त नियम साफ हैं—राष्ट्रीय राजमार्गों और सार्वजनिक जगहों पर फुटपाथ अनिवार्य, अतिक्रमण हटाओ, जेब्रा क्रॉसिंग लगाओ, रोड डिवाइडर, सीसीटीवी, रात की लाइटिंग और स्कूलों के पास विशेष सुरक्षा, IRC मानकों का ऑडिट कर ट्रैफिक शांत करने वाले उपाय भी जरूरी। लेकिन चंदौली में ये सिर्फ कागजों पर है।
पिंटू पाल का विद्रोह: शिकायतों पर अनसुना, अब आंदोलन का ऐलान
किसान नेता पिंटू पाल ने स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और अधिकारियों से बार-बार फुटपाथ निर्माण, सड़क डिजाइन सुधार व हादसों की रोकथाम की गुहार लगाई। लेकिन जवाब? सिर्फ चालान और छापामारी। अब वो भड़कने को तैयार—सकलडीहा कमालपुर मार्ग पर विरोध प्रदर्शन का प्लान। पिंटू पाल बोले, “प्रशासन सो रहा है, लेकिन हम जागेंगे—सड़कें पैदल यात्रियों की होंगी, मौत की नहीं। “चंदौलीवासी जागो। प्रशासन कब सुनेगा? फुटपाथ बने या हादसे बढ़ते रहें?

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