जानलेवा चाइनीज मंझे का करें परित्याग-मुकेश जायसवाल

न्यायालय द्वारा प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रही बिक्री, इंसानों के साथ बेजुबान पशु पक्षियों की जा रही जानें
वाराणसी। न्यायालय के द्वारा रोक के आदेश के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहे प्रतिबंधित मांझा का खतरा इंसानों के साथ बेजुबान पशु-पक्षियों के ऊपर साल के 12 महीने मंडराता रहता है. कई अनगिनत घटनाएं हो चुकी है, जिसमें मासूम बच्चे, युवक व वृद्ध की मौतें भी हो चुकी हैं.
प्रतिबंधित चाइनीज कातिल मंझा साल के 12 महीने बाजार में चोरी-चुपके बेधड़क बिक रहे हैं. आगामी पर्व मकर संक्रांति पर पतंगों का पर्व को देखते हुए गाहे-बगाहे लोगों के गले का फांस बने जानलेवा प्रतिबंधित कातिल चाइनीज मांझा के बिक्री पर रोक का कड़ाई से पालन कराने के लिए प्रशासन से मांग को लेकर मछोदरी स्थित सामाजिक संस्था सुबह-ए-बनारस क्लब के बैनर तले संस्था के अध्यक्ष मुकेश जायसवाल, लक्ष्मी नर्सिंग कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ अशोक कुमार राय, कालेज के प्रधानाचार्य डॉ० अखिलेंद्र त्रिपाठी, उपाध्यक्ष अनिल केसरी, के नेतृत्व में सुड़िया स्थित सरस्वती इंटरमीडिएट कॉलेज के परिसर में छात्राओं के बीच हाथों में बैनर व पतंग लेकर अपने अपने भाइयों और आसपास के पड़ोसियों को प्रतिबंधित चाइनीज मांझा से पतंग ना उड़ाने के अपील के साथ जागरूक करने के उद्देश्य से एक जन जागरूकता अभियान चलाया गया.
उपरोक्त अवसर बोलते हुए संस्था के अध्यक्ष मुकेश जायसवाल, लक्ष्मी नर्सिंग कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रबंध निर्देशक डॉ अशोक कुमार राय, कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ अखिलेंद्र त्रिपाठी, उपाध्यक्ष अनिल केसरी, ने कहा कि पतंग उड़ाने का शौक सदियों से चला रहा है.
मगर वही शौक जब जानलेवा बन जाए जिसके कारण इंसान तो इंसान बेजुबान निरिह पशु-पक्षी इसके मकड़जाल में फंसकर अपनी प्राण को त्यागते हैं. यह अपराध की श्रेणी में आता है. शासन प्रशासन वक्त वक्त पर इसके खिलाफ कार्रवाई करती रहती है. पतंग के शौकीनों से विनम्र अपील है कि जनहित में मानवता को देखते हुए विदेशी मांझा का परित्याग कर अपने शौक को स्वदेशी मांझा से पूरा करें.
ज्ञात हो कि न्यायालय के द्वारा रोक के आदेश के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहे प्रतिबंधित मांझा का खतरा इंसानों के साथ बेजुबान पशु-पक्षियों के ऊपर साल के 12 महीने मंडराता रहता है. कई अनगिनत घटनाएं हो चुकी है, जिसमें मासूम बच्चे, युवक व वृद्ध की मौतें भी हो चुकी हैं.
घायलों की गिनती ही नहीं है. मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से ताजा उदाहरण रोज देखने और सुनने को मिल रहे हैं. इस जानलेवा मांझे से इतने लोगों की मृत्यु हो चुकी है. जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता. ज्ञात और अज्ञात रूप में कई लोग गंभीर रूप से इसके शिकार हो चुके हैं, और हो रहे हैं.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से:- मुकेश जायसवाल, डॉ अशोक कुमार राय, डॉ अखिलेंद्र त्रिपाठी, अनिल केसरी, कोषाध्यक्ष नंद कुमार टोपी वाले, वरिष्ठ अध्यापक कमलेश सिंह, गणेश सिंह, श्याम दास गुजराती, ललित गुजराती, बी.डी. टकसाली सहित सैकड़ों छात्र छात्राएं शामिल थी।