धानापुर-रायपुर जमीन विवाद में नवनीत सिंह समेत तीन को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत

धानापुर, चंदौली। धानापुर-रायपुर मार्ग पर जमीन की कथित अवैध प्लाटिंग के मामले में आरोपी बनाए गए नवनीत सिंह, राजबहादुर सिंह और सतीश सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने 10 सितंबर 2026 को अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में तीनों आवेदकों को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा और न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। आदेश में न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
नवनीत सिंह के अनुसार, धानापुर-रायपुर मार्ग पर सुनार परिवारों की जमीन को कथित अवैध प्लाटिंग से बचाने और उनके हितों की रक्षा के उद्देश्य से उन्होंने संबंधित भूमि के संबंध में एग्रीमेंट किया था। उनका दावा है कि जमीन पर हो रही कथित अवैध प्लाटिंग का मामला सामने लाने और गरीब परिवारों की जमीन बचाने की कोशिश के बाद उनके खिलाफ तथ्यों के विपरीत एफआईआर दर्ज कर उन्हें आरोपी बनाया गया।
मामले में नवनीत सिंह समेत तीन लोगों के खिलाफ विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। नवनीत सिंह का कहना है कि उनके ऊपर सोशल मीडिया पर खबर प्रसारित करने के साथ ही नेपाल में छिपे होने का आरोप भी लगाया गया। उन्होंने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य जमीन से जुड़े विवाद को सामने लाना और संबंधित परिवारों के हितों की रक्षा करना था।
हाईकोर्ट के उपलब्ध आदेश के पृष्ठ में न्यायालय ने अग्रिम जमानत के सिद्धांतों पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया है। आदेश में Sushila Aggarwal and others vs. State (NCT of Delhi) and another तथा Siddharth vs. State of Uttar Pradesh & Another मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का संदर्भ दिया गया है। न्यायालय ने अग्रिम जमानत पर विचार करते समय अपराध की प्रकृति, आरोपी की भूमिका, जांच को प्रभावित करने की संभावना, साक्ष्यों से छेड़छाड़ तथा न्याय से फरार होने की संभावना जैसे पहलुओं पर विचार किए जाने का उल्लेख किया है।
आदेश में Siddharth बनाम State of Uttar Pradesh मामले का हवाला देते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता को संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण पक्ष बताया गया है। साथ ही यह उल्लेख किया गया है कि केवल किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कानूनी शक्ति मौजूद होने से हर स्थिति में गिरफ्तारी जरूरी नहीं हो जाती। गिरफ्तारी के औचित्य और आवश्यकता पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इसके बाद न्यायालय ने कहा कि मामले की परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति, आवेदकों की भूमिका और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद, बिना मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए, अग्रिम जमानत का मामला बनता है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत आवेदन को स्वीकार किया गया।
आदेश के पैरा 14 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आवेदकों—नवनीत सिंह, राजबहादुर सिंह और सतीश सिंह—की गिरफ्तारी होती है तो उन्हें अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। यह राहत जांच पूरी होने अथवा पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक लागू रहने संबंधी निर्देशों के साथ दी गई है। आदेश के उपलब्ध हिस्से में जांच में सहयोग और न्यायालय की निर्धारित शर्तों के अनुपालन की बात भी सामने आती है।
नवनीत सिंह ने कहा कि जमीन का विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं रहता। जमीन से जुड़े मामलों में परिवारों की वर्षों की कमाई, भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति तक प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी जमीन के कागजात, राजस्व अभिलेख और मुकदमेबाजी के बीच फंसता है तो उसका मानसिक दबाव भी बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि धानापुर क्षेत्र में यदि कोई व्यक्ति जमीन संबंधी विवाद से परेशान है और उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले को समझने में सहयोग ले सकता है। उनका कहना है कि सहायता निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन इसके लिए मामला तथ्यों, दस्तावेजों और कानून की कसौटी पर सही होना चाहिए।
नवनीत सिंह के मुताबिक, जमीन से जुड़े मामलों में कागजात, राजस्व अभिलेख और उपलब्ध न्यायालयी आदेशों को समझना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि केवल आरोपों के आधार पर किसी मामले में निष्कर्ष निकालने के बजाय दस्तावेज और कानूनी स्थिति देखी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धानापुर-रायपुर मार्ग की जमीन से जुड़ा मामला भी इसी प्रयास का हिस्सा था। उनका दावा है कि सुनार परिवारों की जमीन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने संबंधित भूमि की स्थिति सामने लाने तथा कथित अवैध प्लाटिंग के खिलाफ आवाज उठाई। एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष है कि उन्हें तथ्यों के विपरीत आरोपी बनाया गया।
अग्रिम जमानत मिलने के बाद नवनीत सिंह ने न्यायपालिका में विश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय की उम्मीद थी और आगे भी वह सत्य एवं न्याय के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में उनका प्रयास तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर लोगों की मदद करने का रहेगा।
महत्वपूर्ण: हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों को गलत या सही घोषित कर दिया है। उपलब्ध आदेश में स्वयं न्यायालय ने कहा है कि अग्रिम जमानत देते समय मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की जा रही है।
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संपादक: संजय कुमार दिनकर
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