चंदौली में संविधान दिवस पर स्वामी प्रसाद मौर्य का होगा आगमन

2008 से मनाया जाता है संविधान दिवस, LBDASS डॉ. अंबेडकर के विचारों का अनुपालन करती है
चंदौली, भारतीय संविधान 26 नवम्बर 1949 को पारित किया गया. जिससे हमारा लोकतांत्रिक गणराज्य स्थापित हुआ. इस महान अवसर को राष्ट्रीय संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है. लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति द्वारा जन अपेक्षाओं को आवाज देने के लिए वर्ष 2008 से अनवरत जिला मुख्यालय पर संविधान दिवस मनाया जाता रहा है. उपस्थित वक्ताओं द्वारा डॉ अंबेडकर के जीवन संघर्षों और संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाता है. इस बार संविधान दिवस पर स्वामी प्रसाद मौर्य का आगमन मुख्य अतिथि के तौर पर होगा. इस आशय की जानकारी महासचिव लल्लन कुमार ने दी.
संविधान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य
भारतीय संविधान के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना, संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देना और लोकतंत्र को मजबूत करना है. यह दिन नागरिकों को संविधान के मूलभूत सिद्धांतों, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में शिक्षित करना और कानून के शासन के महत्व को सुदृढ़ करना और डॉ. बी. आर. अंबेडकर का संविधान निर्माता के रूप में में याद दिलाने और सम्मानित करने का दिन है. यह दिन न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
जन अपेक्षाओं को आवाज देने के लिए मनाते हैं संविधान दिवस
लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन प्रसाद आर्य ने बताया कि संविधान दिवस संविधान के जनक माने जाने वाले डॉ. बी.आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने और उन्हें नमन करने और जन अपेक्षाओं को आवाज देने के लिए मनाते है. 26 नवंबर को भारत के संविधान को अपनाया गया था, जो बाद में 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ. यह दिन भारतीय संविधान के लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय, स्वतंत्रता, समानता जैसे सिद्धांतों का सम्मान करता है, तथा नागरिकों को संवैधानिक मूल्यों के बारे में जागरूक करने और मौलिक अधिकारों की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है. इस दिन को मनाने की शुरुआत 2015 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर हुई थी, लेकिन लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के बैनर तले वर्ष 2008 से ही संविधान दिवस मनाया जाता रहा है।