चंदौली में भीषण आग ने किसानों का बर्बाद कर दिया सपना

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सैकड़ों एकड़ गेहूं राख, 30 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजे का ऐलान


सकलडीहा, चंदौली, 11 अप्रैल 2026: लूभरी गर्मी और प्रचंड हवाओं ने शनिवार को सकलडीहा तहसील के अमावल, डैनापर, मनियारपुर और बरठीं गांवों में कहर बरपा दिया। खेतों में अचानक भड़की आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। सैकड़ों एकड़ में लहलहाती गेहूं की फसल, जो कटाई के ठीक चंद दिन पहले तैयार हो चुकी थी, जलकर राख हो गई। साल भर की कड़ी मेहनत पर पानी फिर गया और किसानों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

आग की भयावहता: किसानों की आंखों के सामने राख हुआ सब कुछ
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग का मुहाना इतना तेज था मानो आकाश से कोई अग्नि-रथ उतर आया हो। “सुबह के 11 बजे के आसपास एक खेत से धुआं उठा, फिर हवा की मदद से आग ने पूरे इलाके को लपेट लिया। हमने बाल्टियां भरीं, लेकिन आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि कुछ करने का मौका ही न मिला,” बताया रामप्रकाश यादव, एक प्रभावित किसान ने। आग इतनी भयंकर थी कि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचने से पहले ही 200 से अधिक एकड़ फसल नष्ट हो चुकी थी। ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों और हैंडपंपों से पानी डालकर किसी तरह आग को काबू किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। खेतों में अब सिर्फ काली राख बिछी है, जो किसानों की टूटी उम्मीदों की कहानी कह रही है।

प्रशासन हरकत में: SDM से सांसद तक पहुंचे मौके पर
आग की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन फौरन सक्रिय हो गया। थानाध्यक्ष भूपेंद्र कुमार निषाद अपनी पूरी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों का निर्देशन किया। उपजिलाधिकारी (SDM) ने प्रभावित गांवों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। क्षेत्रीय सांसद भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित किसानों से मिले। अधिकारियों ने किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा, “शासन पूरी तरह आपके साथ है। नुकसान का पारदर्शी आकलन होगा और हर पीड़ित किसान को मुआवजा समय पर मिलेगा।”

लेखपालों को तत्काल निर्देश दिए गए हैं कि वे सर्वे रिपोर्ट तैयार करें। जिला प्रशासन ने घोषणा की है कि प्रति एकड़ 30,000 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि फसल बीमा योजना और राज्य आपदा राहत कोष से दी जाएगी, ताकि किसान नई फसल बो सकें।
किसानों की व्यथा: आंसुओं में भीगी आंखें, टूटे सपने
खेतों में खड़ी राख को देखकर किसानों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। “यह फसल हमारी साल भर की कमाई थी। कर्ज लेकर बीज, खाद डाली थी। अब बच्चे पढ़ाई कैसे करेंगे?” रोते हुए बोले मनियारपुर के किसान रामनाथ। एक बुजुर्ग किसान ने बताया, “पिछले साल सूखे का कहर झेला, इस बार आग ने लूट लिया। सरकार का मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन हमारी मेहनत का दर्द कौन लौटाएगा?” ग्रामीण स्तब्ध हैं, और पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया है।
यह घटना जलवायु परिवर्तन और खेती की असुरक्षा की पोल खोल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी बढ़ने से ऐसी आग लगने की घटनाएं आम हो रही हैं। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों के आसपास घास-झाड़ियां साफ रखें और आग से सावधानी बरतें।

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