सकलडीहा पीजी कॉलेज में यूथ एम्प्लॉयबिलिटी प्रोग्राम, विद्यार्थियों को सिखाया बिजनेस प्लान बनाने का तरीका

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चंदौली। सकलडीहा पीजी कॉलेज में आविष्कार फाउंडेशन के तत्वावधान और अर्थशास्त्र विभाग के सहयोग से यूथ एम्प्लॉयबिलिटी प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में रोजगारपरक दक्षता, उद्यमशीलता और नवाचार की भावना विकसित करने के साथ उन्हें व्यवसाय, उद्यमिता एवं स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम के दौरान आविष्कार फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर विकास कुमार और फील्ड ऑफिसर कुश कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विद्यार्थियों को नए व्यावसायिक विचारों को व्यवहारिक बिजनेस प्लान में बदलने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी नए व्यवसाय की शुरुआत केवल विचार से नहीं होती, बल्कि उस विचार का मूल्यांकन, बाजार की जरूरतों की पहचान और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करते हुए उसे व्यावहारिक योजना का रूप देना जरूरी है।
विद्यार्थियों को विशेष रूप से सात चरणों में बिजनेस प्लान तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसमें नए बिजनेस आइडिया के चयन से लेकर उसके मूल्यांकन, बाजार की आवश्यकता को समझने और व्यावसायिक योजना तैयार करने तक के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि अपने ज्ञान और कौशल के आधार पर किस प्रकार नए अवसरों की पहचान कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को 3 से 5 सदस्यों के समूह में अपने नवीन व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विद्यार्थियों ने अपने-अपने विचारों के माध्यम से संभावित व्यवसायों और रोजगार सृजन की संभावनाओं को सामने रखा। प्राप्त विचारों में से उत्कृष्ट एवं नवोन्मेषी बिजनेस आइडिया का चयन किया जाएगा, जिन्हें आगे जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए भेजा जाएगा।
इस दौरान प्रो. प्राचार्य प्रदीप कुमार पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पारंपरिक रोजगार के साथ उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पास नए विचार और संभावनाएं होती हैं। यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
अर्थशास्त्र विभाग के विभाग प्रभारी प्रो. इन्द्र देव सिंह ने भी विद्यार्थियों को उद्यमशील दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि नए व्यवसायिक अवसरों की पहचान कर रोजगार सृजन की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. अमन मिश्रा, डॉ. योगेंद्र तिवारी और डॉ. मीनू श्रीवास्तव सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजक बनने की दिशा में सोच विकसित करने का संदेश दिया गया।

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