भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी से भड़का आक्रोश, यादव महासभा ने फूंका धीरेंद्र शास्त्री का पुतला
भगवान श्रीकृष्ण केवल एक धार्मिक आराध्य नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और गौरव के प्रतीक हैं। भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों सनातन परंपरा के पूज्य स्वरूप हैं। ऐसे में उनकी तुलना को लेकर उठे विवाद ने धार्मिक मंचों से निकलने वाले शब्दों की मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

धानापुर के गुरेहूं गांव में प्रदेश सचिव राजीव यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन, बयान पर जताई कड़ी आपत्ति
धानापुर (चंदौली)। भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में यादव महासभा का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। मंगलवार को चंदौली जिले के धानापुर क्षेत्र स्थित गुरेहूं गांव में यादव महासभा के प्रदेश सचिव राजीव यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान के प्रति जिम्मेदार भाषा के इस्तेमाल की मांग उठाई।
दरअसल, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में एक धार्मिक कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी। वायरल वीडियो में उन्होंने भगवान श्रीराम को सीधा और भगवान श्रीकृष्ण को टेढ़ा बताते हुए कहा था कि उनके राम सीधे खड़े होते हैं, जबकि कृष्ण तीन जगह से टेढ़े दिखाई देते हैं। उन्होंने बांसुरी बजाने और धनुष चलाने की भी तुलना की थी। इस टिप्पणी को लेकर श्रीकृष्ण भक्तों और यादव समाज के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी और कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण में भेद पैदा करना नहीं था। उन्होंने किसी की भावना आहत होने पर क्षमा भी मांगी।
इसी विवाद के विरोध में गुरेहूं गांव में यादव महासभा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। प्रदेश सचिव राजीव यादव के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और गौरव के प्रतीक हैं। धार्मिक मंचों से ऐसी तुलनात्मक टिप्पणियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे किसी समाज या श्रद्धालु की भावनाएं आहत हों।
प्रदर्शन के माध्यम से यादव महासभा ने स्पष्ट किया कि आस्था और सामाजिक सम्मान से जुड़े विषयों पर किसी भी तरह की गैर-जिम्मेदार टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। सार्वजनिक जीवन में प्रभाव रखने वाले लोगों को अपने शब्दों की मर्यादा और उनके सामाजिक प्रभाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
इस दौरान इन्द्रजीत यादव, रामू यादव, विकास यादव, रामरतन, दिनेश, सुजीत, छोटेलाल, संदीप, विनोद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।