चंदौली में UPI शुल्क के विरोध में व्यापारी लामबंद, DM को सौंपा ज्ञापन
चंदौली में व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि के नेतृत्व में UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क का विरोध किया गया। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शुल्क वापस लेने की मांग की गई।
चंदौली। UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के विरोध में जिला व्यापार मंडल ने आवाज बुलंद की। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि के नेतृत्व में विरोध दर्ज कराते हुए जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ की आशंका
व्यापारियों का कहना है कि UPI भुगतान छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक लेन-देन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। कम मुनाफे पर व्यापार करने वाले दुकानदारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ व्यापारियों के हितों की रक्षा करना भी जरूरी है।
डिजिटल इंडिया अभियान पर असर की चिंता
UPI ने नकदी पर निर्भरता कम करने और त्वरित भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है।
व्यापारियों की चिंता है कि पात्र मर्चेंट भुगतानों पर शुल्क लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इससे डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
प्रस्तावित शुल्क पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है। बताया जा रहा है कि यह शुल्क पात्र व्यापारियों से लिया जाना है, ग्राहकों से सीधे नहीं। हालांकि, प्रस्ताव की आधिकारिक स्थिति और लागू होने की शर्तों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक निर्देश से किया जाना आवश्यक है।
शुल्क वापसी की मांग
ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित MDR शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से बचना चाहिए।