चंदौली में डबल मर्डर; छह दिन बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी, धीना पुलिस के हाथ खाली

चंदौली के इस दोहरे हत्याकांड में करोड़ों की पैतृक जमीन का विवाद अहम कड़ी माना जा रहा है। छह दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच की दिशा और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल बने हुए हैं। अब मामले के खुलासे की उम्मीद आरोपियों की गिरफ्तारी और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के विश्लेषण पर टिकी है।

चंदौली। धीना थाना क्षेत्र के डेढ़गांवा गांव के पास दो युवकों की हत्या के मामले में छह दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। 22 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर बोरी में बंद मिले दोनों शवों की पहचान गाजीपुर निवासी सिद्धार्थ सिंह और कानपुर निवासी सागर त्रिपाठी के रूप में हुई थी। शुरुआती जांच में हाईवे से सटी करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन को हत्याकांड की संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जमीन के विवाद में हत्या की आशंका

पुलिस जांच के अनुसार, सिद्धार्थ सिंह गाजीपुर जिले के नंदगंज थाना क्षेत्र के बरहपुर का निवासी था। उसके परिवार की हाईवे से सटी करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति थी। जांच में जमीन की रजिस्ट्री के सिलसिले में सिद्धार्थ को बुलाए जाने और उसके खाते में रुपये भेजे जाने की बात सामने आई है। इसी जमीन को हत्याकांड की संभावित वजह माना जा रहा है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों दोस्तों को धानापुर थाना क्षेत्र के मेढ़वा गांव के सिवान में स्थित एक मड़ई में मुर्गा और शराब की पार्टी के बहाने बुलाया गया था। वहां दोनों की गोली मारकर और गला रेतकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद शवों को बोरी में भरकर स्कॉर्पियो से करीब 15 किलोमीटर दूर डेढ़गांवा गांव के पास फेंक दिया गया था।

साक्ष्यों के सहारे आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश

दोनों शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में मड़ई से मिले साक्ष्यों और वारदात में इस्तेमाल की गई बताई जा रही स्कॉर्पियो को अहम माना जा रहा है। इसके बावजूद छह दिन बीतने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। फरार आरोपियों के घरों पर ताला लटका होने की जानकारी भी सामने आई है।

सीओ सकलडीहा कृष्ण मुरारी के मुताबिक, मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस जमीन के विवाद समेत घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, हत्याकांड में शामिल लोगों की गिरफ्तारी और वारदात के पीछे की पूरी वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

सात बहनों में इकलौता भाई था सिद्धार्थ

सिद्धार्थ सिंह अपने परिवार में सात बहनों के बीच इकलौता भाई था। पिता अजेंद्र सिंह की मृत्यु के बाद वह अपनी मां के साथ कानपुर के जाजमऊ में रहता था। उसका दोस्त सागर त्रिपाठी कानपुर के यशोदा नगर, नौबस्ता का निवासी था। दोनों कानपुर से वाराणसी घूमने की बात कहकर निकले थे।

सिद्धार्थ की चचेरी बहन की शादी मेढ़वा गांव में हुई थी, जिसके चलते उसका वहां आना-जाना रहता था। परिवार में इकलौता बेटा होने के कारण पैतृक संपत्ति का मामला भी जांच के केंद्र में है।