धानापुर में श्रीराम कथा का मंच बना सियासी अखाड़ा, राजन महाराज ने सुशील सिंह को फिर विधायक बनाने की अपील की 

धार्मिक आयोजन आस्था, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों के प्रसार के महत्वपूर्ण मंच हैं। इन मंचों से राजनीतिक संदेश देना अपने आप में चर्चा का विषय बन सकता है, खासकर जब किसी जनप्रतिनिधि के पक्ष में आगामी चुनाव में समर्थन की अपील की जाए। लोकतंत्र में जनता का समर्थन महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अहम है जनप्रतिनिधियों के कामकाज का निष्पक्ष मूल्यांकन। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनसुविधाओं के सवालों पर जवाबदेही तय करना ही जागरूक नागरिकता और मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।

धार्मिक आयोजन से चुनावी संदेश से राजनीतिक इस्तेमाल पर उठे सवाल, दिग्गज नेताओं के जमावड़े के बीच हेलीकॉप्टर नहीं पहुंचे तो मायूस हुई भीड़

धानापुर, चंदौली। सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के धानापुर स्थित विजयदशमी पोखरा पर आयोजित श्रीराम कथा का समापन धार्मिक आस्था के साथ सियासी संदेशों को लेकर चर्चा में रहा। 20 अक्टूबर से चल रही अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज की कथा के अंतिम दिन दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा। इसी दौरान वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में विधायक सुशील सिंह को दोबारा जिताने की अपील ने धार्मिक मंच की राजनीतिक भूमिका को बहस के केंद्र में ला दिया। सवाल उठने लगा कि आस्था के मंच से चुनावी संदेश देना कितना उचित है और क्या ऐसे आयोजनों में जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर भी चर्चा होनी चाहिए?

कथा के मंच से 2027 का चुनावी संदेश

कथा के समापन पर राजन जी महाराज ने लोगों से सुशील सिंह को वर्ष 2027 में फिर विधायक बनाने की अपील की। विधायक के कार्यों की सराहना और आगामी चुनाव में समर्थन के संदेश के बीच कार्यक्रम का स्वर धार्मिक प्रवचन से आगे राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, हंसराज विश्वकर्मा, संजय गौड़, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह, नौगढ़ ब्लॉक प्रमुख सुजीत सिंह, धानापुर ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह, सकलडीहा ब्लॉक प्रमुख अवधेश सिंह और बरहनी ब्लॉक प्रमुख पति महेंद्र सिंह समेत कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।

नेताओं की मौजूदगी और चुनावी अपील ने आयोजन को राजनीतिक दृष्टि से अहम बना दिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र की सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य बुनियादी समस्याओं पर चर्चा कितनी हुई, यह भी जनहित से जुड़ा सवाल है।

आस्था के मंच पर राजनीति, जवाबदेही पर भी हो चर्चा

धार्मिक आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी असामान्य नहीं है, लेकिन जब किसी जनप्रतिनिधि को आगामी चुनाव में दोबारा जिताने की अपील होने लगे तो आयोजन के राजनीतिक निहितार्थ पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतंत्र में समर्थन की अपील के साथ जनता को यह पूछने का भी अधिकार है कि क्षेत्र में विकास के कितने वादे पूरे हुए, युवाओं को रोजगार कितना मिला और शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में क्या बदलाव आया।

ऐसे में श्रीराम कथा के मंच से निकला चुनावी संदेश केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने धार्मिक आयोजनों की मर्यादा और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर बहस को भी हवा दी।

मथुरा पर सवाल, बृजभूषण ने कहा- ‘चलिए’

कार्यक्रम में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से पत्रकारों ने अयोध्या और काशी के बाद मथुरा को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए ‘चलिए’ कहा और आगे बढ़ गए। उन्होंने इस मुद्दे पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। उनकी इस प्रतिक्रिया ने भी कार्यक्रम के दौरान लोगों का ध्यान खींचा।

हेलीकॉप्टर की उम्मीद में पहुंचे लोग, हुई निराशा

कार्यक्रम में दो हेलीकॉप्टर आने की संभावना के चलते कथा स्थल पर दो हेलीपैड तैयार किए गए थे। हेलीकॉप्टर देखने की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग जुटे, लेकिन उड़ान का कार्यक्रम रद्द होने की सूचना से उन्हें निराशा हाथ लगी। नेताओं की मौजूदगी और हेलीकॉप्टर की चर्चा ने आयोजन को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी थी।

400 से अधिक वॉलंटियर ने संभाली व्यवस्था

कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुचारु रखने के लिए धानापुर ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह की देखरेख में 400 से अधिक वॉलंटियर लगाए गए थे। महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की भी तैनाती रही। आयोजकों के मुताबिक, भंडारे में अब तक 15 हजार से अधिक लोग प्रसाद ग्रहण कर चुके थे। देसी घी की पूड़ी, सब्जी और बुनिया तैयार करने के लिए 400 से अधिक कारीगर जुटे रहे।