जमीन मेरा हक, कब्जा उनकी जुल्म की मार

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चकिया तहसील की सीढ़ियों पर लाठी टेक बुजुर्ग विधवा की पुकार,


चंदौली के अम्मर डहिया गांव की धनवन्ती देवी की दर्दभरी कहानी—15 बिस्वा जमीन पर दूसरी पत्नी का अवैध कब्जा, प्रशासनिक चक्करों में उम्र का साथ छूटा
चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र के अम्मर डहिया गांव से निकली यह तस्वीर सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर करारा तमाचा है। 70 पार धनवन्ती देवी, जिनकी कमर झुक चुकी है और हाथ लाठी का सहारा मांगते हैं, आज अपने ही हक की 15 बिस्वा जमीन के लिए दर-दर भटक रही हैं। उनकी चप्पलें तहसील की चौखट पर घिस चुकीं, लेकिन न्याय का द्वार अभी भी बंद है।
फोटो: धनवन्ती देवी शिकायत पत्र हाथ में लिए 
कहानी शुरू होती है धनवन्ती के पति श्याम लाल से
 सालों की वफादारी के बाद श्याम लाल ने दूसरी शादी कर ली। आरोप है कि नई पत्नी ने न सिर्फ धनवन्ती के साथ जमकर मारपीट की, बल्कि उनके नाम की लगभग 15 बिस्वा उपजाऊ जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। गांव वालों के मुताबिक, यह जमीन धनवन्ती का वैवाहिक हक थी, जिसके कागजात उनके पास सुरक्षित हैं—खसरा नंबर 245, खतौनी में स्पष्ट दर्ज। लेकिन दूसरी पत्नी के भारी-भरकम रसूख के आगे कोई बोलने को तैयार नहीं।
तहसील के चक्कर: उम्मीदों का सैलाब, हकीकत में खाली हाथ
पिछले छह महीनों में धनवन्ती पांच बार चकिया तहसील पहुंचीं। हर बार हाथ में कागजात, गुहार पत्र और आंसुओं की उम्मीद लेकर। “साहब, मेरी जमीन दिलवा दीजिए… बस इतना ही मेरा हक है,” कंपकंपाती आवाज में यही पुकार। लेकिन हर दफे वही कहानी—’फाइल आगे भेज दी’, ‘जांच होगी’, या फिर ‘कल आइए’। तहसील की ऊंची-नीची सीढ़ियां चढ़ते उतरते उनकी सांसें उखड़ने लगीं। एक बार तो चक्कर आ गया, लेकिन स्टाफ ने सिर्फ पानी पिलाया और विदा कर दिया। अब उनकी चप्पलें फटी पड़ी हैं, जो तहसील के गलियारे में गवाह बन चुकी हैं।
प्रशासनिक लापरवाही: कागजों का खेल या न्याय का मजाक?
सवाल वही पुराने—क्या एक विधवा बुजुर्ग को बुढ़ापे में इस तरह अपमानित होना पड़ेगा? चकिया तहसील में शिकायतों का ढेर लगा है, लेकिन हल निकलता कहां है? स्थानीय राजस्व अधिकारियों से बातचीत में पता चला कि जमीन विवाद के ऐसे सैकड़ों केस लंबित हैं, जहां प्रभावशाली लोग कब्जा जमाए बैठे हैं। धनवन्ती का केस भी उसी कतार में। क्या तहसीलदार साहब की जांच रिपोर्ट कभी धनवन्ती तक पहुंचेगी? या यह पुकार अनसुनी रह जाएगी?
गांव की आवाज: न्याय की मांग
अम्मर डहिया के ग्रामीणों ने भी साथ दिया। पंचायत प्रतिनिधि रामू यादव ने कहा, “धनवन्ती बहू जैसी हैं। उनकी जमीन पर कब्जा गलत है। प्रशासन को तहसीलदार से लेकर DM स्तर तक कार्रवाई करनी चाहिए।” एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि दूसरी पत्नी ने खेती भी शुरू कर दी है, जिससे धनवन्ती का गुजारा मुश्किल हो गया।चंदौली प्रशासन अब इस मामले पर नजर डाले। क्या DM चंदौली त्वरित जांच करवाएंगे? क्या धनवन्ती को उनका हक मिलेगा, या व्यवस्था का यह काला अध्याय यूं ही जारी रहेगा? समय बताएगा, लेकिन धनवन्ती की पुकार सबको झकझोर रही है—”मेरा हक… बस मेरा हक!”

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