SIR के बाद हुए चुनाव रद्द हों, निर्वाचन आयोग की भूमिका की जांच कराई जाए: चंद्रशेखर आजाद

चंद्रशेखर आजाद ने SIR के बाद हुए चुनाव रद्द करने, निर्वाचन आयोग की भूमिका की जांच और बैलेट पेपर से मतदान कराने समेत पांच प्रमुख मांगें उठाई हैं। इन मांगों के केंद्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही और निर्वाचन प्रक्रिया पर जनता का भरोसा है।

नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने मतदाता सूची में संशोधन, फॉर्म-6 और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर शुक्रवार को गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद हुए सभी चुनाव रद्द करने, पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संबंधित कानून में किए गए बदलावों की समीक्षा की भी मांग रखी है।

चंद्रशेखर आजाद ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं की आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, निर्वाचन आयोग के फॉर्म-6 संबंधी बयानों और सुप्रीम कोर्ट के कथित स्पष्टीकरण के बीच अंतर को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह निर्धारित किया जाए कि संबंधित निर्णय कैसे लिए गए, किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।

आजाद ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े वर्ष 2023 के कानून में किए गए बदलावों की समीक्षा की मांग भी की। उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर किसी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कार्यों के संबंध में दिए गए कानूनी संरक्षण के प्रावधान की समीक्षा करने की भी बात कही।

इसके साथ ही उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे का हवाला देते हुए ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग उठाई।

पांच प्रमुख मांगें

चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें SIR के बाद हुए चुनाव रद्द करना, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराना, चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून में बदलावों की समीक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए संसद में चर्चा और बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए मतदाता सूची में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।