नमाजियों ने मुल्क में अमन और चैन की मांगी दुआएं

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एक दूसरे को गले लगाकर दी मुबारकबाद, वफ्फ बोर्ड बिल का किया विरोध

नई दिल्ली, सटीक संवाद। सोमवार को देश भर में मुस्लिम भाईयों ने सुबह ईदगाहों पर पहुंचकर नमाज अदा की. नमाज के बाद एक दूसरे को गले लगाकर ईद उल फितर की बधाई दी. वहीं मुल्क में अमन और चैन की दुआएं मांगी. कई जगहों पर वफ्फ बोर्ड बिल का विरोध किया गया है. ऐसे में कुछ युवा बांह पर काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज अदा करने पहुंचे थे.ईदगाहों में सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस प्रशासन मुस्तैद रही.

रमजान के पाक महीने के समापन के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर का त्योहार देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया. ईद की नमाज अदा करवाई गई और मुल्क में अमन और चैन की दुआएं मांगी गई. इस दौरान कुछ जगहों पर युवकों द्वारा केंद्र सरकार के वफ्फ बोर्ड को समाप्त करने के लिए लाए जा रहे बिल का विरोध किया गया. ऐसे में उन्होंने ईदगाह पर अपनी बांह पर काली पट्टी बांध ईद की नमाज अदा की.

सभी धर्मों के लोगों ने एक-दूसरे को बधाई देकर सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया. इस बाबत उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद के चहनियां क्षेत्र के दरियापुर निवासी जिया अहमद ने बताया कि कैलेण्डर के अनुसार रमजान के पाक महीने के समापन के बाद शव्वाल की पहली तारीख को इस त्योहार को मनाने की परंपरा चली आ रही है. 

आज के दिन इस्लाम धर्म मानने वाले हर मुल्क के लोग ईद मना रहे हैं. इस्लाम धर्म के अनुसार 30 रोजा रखकर मुसलमान भाइयों ने ईद की नमाज ईदगाह और मस्जिदों में जाकर अदा किया है.

उन्होंने बताया कि इस्लाम धर्म के बारे में बताया जाता है कि रमजान के महीने में आसमानी किताब कुरान नाजिल हुआ था अल्लाह ने इस पाक़ीज़ा किताब कुरान मजीद को इस्लाम मजहब मनाने वालों के लिए भेजा था. वह आसमानी किताब है इस किताब के अनुसार इस्लाम धर्म के मानने वाले आखरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म को पूरी दुनिया में फैलाया. 

आज इस्लाम धर्म के मानने वाले सभी मुसलमान भाई पूरे 30 दिनों तक रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं. मस्जिद में ईशा की आजान के बाद तराबी की नमाज सभी मस्जिद में अदा की जाती है. रमजान की पूरे महीने इबादत की जाती है. इस्लाम धर्म में कहा जाता है इस महीने में एक नेकी के बदले में 100 गुना नेकी मिलती है.

 इसलिए सभी मुसलमान भाई इस महीने में पूरी शिद्दत के साथ इबादत करते हैं और गरीबों को लाचारों को अपने जमा पूंजी से पैसे निकाल कर फितरा जकात अदा करते हैं. यह पैसा गरीबों के लिए होता है. 30 रोजा के बाद खुशियों का त्यौहार ईद मनाया जाता है. पूरी दुनिया में इस्लाम मजहब को मानने वाले ईद मनाते हैं. 

ईद में बच्चों को घर वाले रिश्तेदार ईदी के तौर पर कुछ रकम देते हैं. जिसे ईद कहा जाता है. ईदी को लेकर बच्चे काफी खुश होते हैं. ईद की नमाज ज्यादातर लोग ईदगाह में जाकर पढ़ते हैं. ईद के दिन रोजा रखना हराम माना गया है. ईद की नमाज अदा करने के पहले अपने-अपने घरों में स्नान कर पाख व साफ होकर नये नये कपड़े पहनते हैं, और खजूर तथा सेवई खीर मीठी चीज खाकर ईद की नमाज अदा करने जाते हैं. 

नमाज अदा कर घर आए सभी अपने-अपने रिश्तेदारों तथा हिंदू भाइयों को बुलाकर ईद की बधाई देने के बाद मिठाई सेवई आदि खिलाते हैं।

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