बाबा कीनाराम के दरबार में स्वतंत्र सरगम ने बिखेरा सुरों का जादू, गीतों पर झूमे श्रोता

चंदौली समाचार

चहनियां, चंदौली। बाबा कीनाराम जन्मोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार की रात्रि आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुंबई से आए गायक एवं अभिनेता स्वतंत्र यादव सरगम ने अपनी शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। स्वतंत्र सरगम ने एक के बाद एक गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में ऐसा समां बांधा कि मौजूद श्रोता देर रात तक उनकी प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। उनके गीतों पर श्रोता झूमते नजर आए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा कार्यक्रम स्थल गूंजता रहा।

बाबा कीनाराम जन्मोत्सव को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना हुआ है। जन्मोत्सव के दूसरे दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और श्रोता पहुंचे। जैसे ही मंच पर गायक स्वतंत्र यादव सरगम ने अपनी प्रस्तुति शुरू की, कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ गया। उन्होंने अपनी गायकी से श्रोताओं को बांधे रखा और लगातार विभिन्न गीतों की प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

स्वतंत्र सरगम की गायकी के दौरान श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। कई गीतों पर युवा और अन्य श्रोता झूमते दिखाई दिए। मंच से निकल रहे सुरों और गीतों के बीच पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने स्वतंत्र सरगम की प्रस्तुति की सराहना की और देर रात तक कार्यक्रम का आनंद उठाया।

इस दौरान गायक स्वतंत्र यादव सरगम ने बाबा कीनाराम के दरबार में अपनी उपस्थिति और प्रस्तुति को लेकर अपनी भावनाएं भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि बाबा के दरबार में यह उनकी दूसरी बार हाजिरी है। इससे पहले करीब तीन वर्ष पूर्व भी वह यहां अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाबा कीनाराम के दरबार में दोबारा अपनी प्रस्तुति देने का अवसर उनके लिए विशेष महत्व रखता है।

स्वतंत्र सरगम ने बताया कि बाबा कीनाराम के दरबार में अपनी प्रस्तुति देना उनके स्वर्गीय पिता चन्द्रबली यादव का सपना था। उन्होंने बताया कि उनके स्व. पिता चन्द्रबली यादव बाबा कीनाराम के अनन्य भक्त थे और उनकी इच्छा थी कि उनके पुत्र को बाबा के दरबार में अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिले। पिता के इस सपने को याद करते हुए स्वतंत्र सरगम ने बाबा के दरबार में अपनी प्रस्तुति को भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ा हुआ बताया।

उन्होंने कहा कि बाबा कीनाराम की धरती पर आकर प्रस्तुति देना उनके लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था से जुड़ा अवसर भी है। पिता की स्मृतियों को याद करते हुए उन्होंने बाबा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उनकी इस बात के दौरान कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने भी भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति की ओर से गायक स्वतंत्र सरगम को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। समिति के सदस्यों ने उनकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद स्वतंत्र सरगम ने आयोजन समिति और कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं के प्रति आभार जताया।

बाबा कीनाराम जन्मोत्सव के दूसरे दिन आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धा और मनोरंजन का संगम बना रहा। एक ओर बाबा कीनाराम के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर स्वतंत्र सरगम की गायकी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को देर रात तक बांधे रखा। उनके गीतों पर श्रोताओं की प्रतिक्रिया से कार्यक्रम का माहौल लगातार उत्साहपूर्ण बना रहा।

स्वतंत्र सरगम की प्रस्तुति के साथ बाबा कीनाराम जन्मोत्सव का दूसरा दिन भी लोगों के लिए यादगार बन गया। उनकी शानदार गायकी और श्रोताओं के उत्साह ने सांस्कृतिक संध्या को खास बना दिया। कार्यक्रम के समापन तक श्रोताओं में उत्साह बना रहा और लोगों ने स्वतंत्र सरगम की प्रस्तुति की जमकर सराहना की।

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