‘लूट लिखोगे तो सस्पेंड हो जाऊंगा’—थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप, सीएम पोर्टल पहुंचा मामला

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बड़े बाल वाला लुटेरा बताने पर थाने की सक्रियता ठहरी


प्रयागराज: सड़क पर दौड़ते बाइक सवारों ने रोडवेज बस के कंडक्टर का कैश बैग छीन लिया, पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इसलिए बच रही है कि “लूट लिखोगे तो सस्पेंड हो जाऊंगा” — पीड़ित ने सीएम से न्याय की गुहार लगाई।

प्रयागराज में 8 जुलाई की तड़के हुई घटना में बाइक सवार दो शातिरों ने कानपुर से वाराणसी जा रही रोडवेज बस (UP-78 JT-6130) के कंडक्टर सुनील कुमार सिंह का गले में लटका कैश बैग छीनकर भाग गए। बैग में लगभग 22 हजार रुपये नकद, 85 बस टिकट, बाइल (बेबिल) और ऑन‑लाइन टिकट बनाने की मशीन थी। घटना के बाद कंडक्टर ने डायल 112 पर सूचना दी और जॉर्जटाउन थाने में तहरीर दी, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।

पीड़ित और साक्ष्यों के अनुसार मामले की प्रारंभिक छानबीन की गई और सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर ली गई है। कांस्टेबल अनिल सिंह यादव (पीएनओ 254475210) ने जांच रिपोर्ट को एसओ को अग्रसारित कर कमिश्नरेट, प्रयागराज को पत्र भी भेजा। फिर भी थाने के एसओ योगेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मामला “चोरी” में दर्ज करा लो, क्योंकि यदि “लूट” की धारा लगाई गई तो वे सस्पेंड हो सकते हैं। इस कथित टिप्पणी के चलते कंडक्टर ने उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री पोर्टल पर न्याय के लिए शिकायत दर्ज कराई है।

कंडक्टर का कहना है कि उन्होंने घटना के समय बस ड्राइवर द्वारा कथित रूप से दोनों बाइक सवारों का पीछा करने का भी प्रयास देखा, पर वे भागने में सफल रहे। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर सीसीटीवी फुटेज खंगाली और कुछ समय सक्रियता दिखाई, पर एफआईआर दर्ज कराने के समय थाने में दबाव और ढिलाई होने की शिकायत सामने आई है। जब एसओ से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार फोन संपर्क किया गया तो कॉल रिसीव नहीं हुए।
एक अन्य स्थानिय जानकारी के अनुसार लुटेरों में से एक का ‘बड़ा बाल’ था। कंडक्टर सुनील का आरोप है कि जब उन्होंने यह विवरण दिया तो थाने की सक्रियता अचानक शांत पड़ गई, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि पुलिस उक्त लुटेरे को पहचानती है। उन्होंने पुलिस के रवैये पर भी आपत्ति जताई है।
प्रसंगिक अधिकारी अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं कर रहे हैं। प्रयागराज पुलिस और उच्च अधिकारियों से जब इस विषय पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो फोन बार-बार बजने के बावजूद एसओ ने कॉल नहीं उठाई। मामले की सक्रिय जांच और जल्द एफआईआर दर्ज कराने की मांग पीड़ित और स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जा रही है।

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