चकरघट्टा में मारपीट मामले में तीन घंटे की पंचायत बेनतीजा, प्रकरण की निष्पक्ष जांच, चिकित्सकीय परीक्षण, सुरक्षा और कार्रवाई की मांग
हनुमानपुर में शिवशरण कोल से कथित मारपीट के मामले में तीन घंटे चली पंचायत बेनतीजा रही। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवार ने गंभीर चोट व लंबे समय से प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगाए हैं, जबकि भीम आर्मी ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
चंदौली। नौगढ़ तहसील के हनुमानपुर गांव में शिवशरण कोल के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर गुरुवार को करीब तीन घंटे तक पंचायत चली, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। पीड़ित पक्ष ने धर्मेंद्र यादव और नलनी कांत उर्फ भंजू यादव पर गंभीर मारपीट करने, लंबे समय से प्रताड़ित करने और जानमाल का खतरा पैदा करने का आरोप लगाया है। पंचायत में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने भी घटना को लेकर अपने बयान रखे। वहीं, पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।

फोटो कैप्शन: हनुमानपुर गांव में मारपीट के मामले को लेकर पंचायत में मौजूद ग्रामीण व अन्य लोग।
मामला 26 सितंबर 2026 का बताया जा रहा है। हनुमानपुर गांव में भगवान मौर्य की दुकान पर शिवशरण कोल पुत्र स्वर्गीय शंकर कोल के साथ मारपीट का आरोप है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, धर्मेंद्र यादव पुत्र बलवंत यादव और नलनी कांत उर्फ भंजू यादव पुत्र लल्लू यादव ने उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि घटना में शिवशरण के सिर, सीने और हाथों में गंभीर चोटें आईं।
घटना के बाद मामले को लेकर गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत की अध्यक्षता ग्राम प्रधान जय प्रकाश उर्फ शेरू यादव ने की। करीब तीन घंटे तक चली पंचायत में ग्रामीणों और दोनों पक्षों की बात सुनी गई, लेकिन अंत तक कोई समाधान नहीं निकल सका।
प्रत्यक्षदर्शियों ने भी रखी अपनी बात
पंचायत के दौरान प्रत्यक्षदर्शी भगवान मौर्य और स्वारथ खरवार ने घटना को लेकर अपने बयान रखे। उनके अनुसार, शिवशरण के साथ दोनों आरोपितों ने मारपीट की। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान शिवशरण को गंभीर चोटें आईं।
पीड़ित पक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि उसे लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था और आरोपितों की ओर से जानमाल का खतरा बना हुआ है। शिवशरण की मां, पत्नी और चाचा ने भी लंबे समय से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
पंचायत में मौजूद ग्रामीणों के संबंध में पीड़ित पक्ष का दावा है कि बड़ी संख्या में लोगों ने घटना और दोनों पक्षों के बीच चले विवाद को लेकर अपनी बातें रखीं। कुछ ग्रामीणों ने आरोपित पक्ष के व्यवहार को लेकर भी आपत्ति जताई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पंचायत के बाद फिर विवाद बढ़ने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि करीब तीन घंटे चली पंचायत के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। आरोप है कि पंचायत समाप्त होने के बाद भी कथित तौर पर धमकी भरा व्यवहार किया गया और भविष्य में अवसर मिलने पर दोबारा विवाद करने की बात कही गई। इस दौरान मौके पर मौजूद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बन सकी।
पीड़ित पक्ष ने कहा कि घटना के बाद से परिवार में भय का माहौल है और उसे अपनी तथा परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। इसी आधार पर प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
पहले भी सीओ से की जा चुकी है कार्रवाई की मांग
इस मामले में शिवशरण कोल ने क्षेत्राधिकारी नौगढ़ को प्रार्थना पत्र देकर मारपीट, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और घटना के बाद उचित पुलिस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया था। उसने सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराने तथा आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है।

पीड़ित ने पुलिस स्तर पर मामले को रफा-दफा करने के लिए समझौते का दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले का संज्ञान लेते हुए चंदौली भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष रामचंद्र राम ने जिला प्रशासन से प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
फिलहाल तीन घंटे की पंचायत के बाद भी समाधान नहीं निकलने से मामला प्रशासनिक कार्रवाई की ओर बढ़ गया है। पीड़ित पक्ष ने अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, चिकित्सकीय परीक्षण, सुरक्षा और आरोपों के आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की है।