सरकारी संवेदनहीनता ने भ्रष्टाचार की जांच के लिए चार महीने से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता की जान ली : माले

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कहा, भ्रष्टाचार को योगी सरकार का संरक्षण है, शून्य सहनशीलता ढोंग

लखनऊ, 14 मई। भाकपा (माले) ने मथुरा में मनरेगा और शौचालय निर्माण सहित ग्रामीण विकास विभाग में भ्रष्टाचार की जांच के लिए विगत 12 फरवरी से जिले में भूख हड़ताल पर बैठे एक सामाजिक कार्यकर्ता की हुई दुखद मौत के लिए प्रदेश सरकार की आपराधिक संवेदनहीनता को जिम्मेदार ठहराया है।



पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि लोकतांत्रिक प्रतिवाद के प्रति योगी सरकार का रवैया बेहद शर्मनाक है। विरोध की आवाज की उपेक्षा करना, उसका सम्मान न करना और उसे दबा देना भाजपा सरकार में परिपाटी बन गई है। यह लोकतंत्र के प्रति भाजपा के नजरिये को दिखाता है। योगी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) का ढोंग करती है, असल में वह भ्रष्टाचार का संरक्षण करती है। यह उसी प्रकार है, जैसे हाथी के दांत खाने के और तथा दिखाने के और होते हैं।

66 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता देवकी नंद शर्मा मथुरा में ग्रामीण विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार के विरोध में अपने आवास के पास एक मंदिर के बाहर प्रतिवाद धरना-अनशन पर बैठे थे। खबर के अनुसार, वे भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनी टीम की जांच रिपोर्ट से असहमत थे और दोबारा जांच की मांग कर रहे थे, ताकि सही बात सामने आए।

 सरकार ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया और जब चार महीने की भूख हड़ताल से उनका स्वास्थ्य काफी खराब हो गया, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां बुधवार को उनकी मौत हो गयी। माले नेता ने उनकी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

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